डिजिटल इंडिया पर मल्लिकार्जुन खरगे का वार: मोदी सरकार के दावे खोखले, 65% गांव अब भी ब्रॉडबैंड से वंचित

नई दिल्ली। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच जारी तीखे आरोप-प्रत्यारोप के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर डिजिटल इंडिया के मुद्दे पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए खरगे ने दावा किया कि मोदी सरकार के डिजिटल इंडिया के तमाम दावे केवल प्रचार तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत बेहद निराशाजनक है।
भारतनेट योजना पर हमला: 65% गांव अब भी ब्रॉडबैंड से वंचित
खरगे ने भारतनेट परियोजना की विफलताओं को उजागर करते हुए बताया कि इस योजना के तहत देश के 6.55 लाख गांवों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब तक केवल 4.53 लाख गांवों तक ही यह सुविधा पहुंच सकी है। यानी करीब 65% गांव आज भी इससे वंचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस योजना की डेडलाइन पिछले 11 वर्षों में आठ बार बदली जा चुकी है, जबकि अब तक केवल 0.73% यानी 766 ग्राम पंचायतों में ही एक्टिव वाई-फाई सेवाएं चालू हो सकी हैं।
बीएसएनएल और एमटीएनएल को लेकर भी साधा निशाना
कांग्रेस अध्यक्ष ने सार्वजनिक क्षेत्र की टेलीकॉम कंपनियों बीएसएनएल और एमटीएनएल की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बीएसएनएल अब तक 1 लाख 4G टावर लगाने का लक्ष्य भी पूरा नहीं कर पाई है, जबकि निजी कंपनियां 5G की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। सरकार द्वारा बार-बार दिए गए पुनरुद्धार पैकेजों के बावजूद बीएसएनएल निजी कंपनियों से काफी पीछे है। बीएसएनएल का कर्ज जहां मार्च 2014 में ₹5,948 करोड़ था, वहीं मार्च 2024 में यह बढ़कर ₹23,297 करोड़ हो गया है। एमटीएनएल का कर्ज ₹14,210 करोड़ से बढ़कर ₹33,568 करोड़ तक पहुंच गया।
डिजिटल पहुंच और शिक्षा व्यवस्था की खस्ताहाली
खरगे ने दावा किया कि देश में 15 वर्ष से ऊपर की उम्र के 75.3% लोग कंप्यूटर चलाना नहीं जानते हैं। ग्रामीण भारत में यह आंकड़ा 81.9% और शहरी क्षेत्रों में 60.4% है। उन्होंने आरोप लगाया कि आधार आधारित भुगतान की बाध्यता के चलते 7 करोड़ मनरेगा मजदूर स्कीम से बाहर कर दिए गए हैं। सरकारी स्कूलों की स्थिति पर उन्होंने कहा कि 54% स्कूलों में इंटरनेट नहीं है, 79% में डेस्कटॉप की सुविधा नहीं है, 85% में प्रोजेक्टर नहीं है और 79% स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम भी नहीं हैं।
साइबर अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी
खरगे ने साइबर अपराधों में खतरनाक इजाफा होने की बात कही। उन्होंने कहा कि 2020 में 11.58 लाख साइबर केस थे, जो 2024 में बढ़कर 20.41 लाख से ज्यादा हो गए हैं। डिजिटल अरेस्ट स्कैम जैसे अपराध 2022 से 2024 के बीच तीन गुना बढ़े और इनसे जुड़ा धन हानि 21 गुना तक बढ़ गया।
“डिजिटल इंडिया की नींव यूपीए सरकार ने रखी थी”
खरगे ने याद दिलाया कि नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की स्थापना 2009 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में हुई थी। कांग्रेस सरकार ने 2013 में एलपीजी सब्सिडी के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम की शुरुआत की थी, जिससे 9.55 करोड़ लोगों को लाभ मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को सलाह दी कि उन्हें 10 साल के डिजिटल इंडिया अभियान पर आत्ममुग्ध होने के बजाय असफलताओं पर आत्मचिंतन करना चाहिए।