रक्षा मंत्री से मिलीं ‘वाटर वुमन’ शिप्रा पाठक, सिंदूर का पौधा रोपित कर “ऑपरेशन सिंदूर” की बधाई दी

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नई दिल्ली।। पर्यावरण संरक्षण और जल जागरूकता के लिए देशभर में चर्चित ‘वाटर वुमन’ शिप्रा पाठक ने सोमवार को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की। इस दौरान शिप्रा ने उन्हें एवं भारतीय सेना को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर बधाई दी और उनके निवास परिसर में सिंदूर का पौधा रोपित कर राष्ट्र और प्रकृति के प्रति श्रद्धा प्रकट की। शिप्रा पाठक, उत्तर प्रदेश के बदायूं जनपद की तहसील दातागंज निवासी हैं, और पंचतत्त्व संस्था के माध्यम से देशभर में नदियों के संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरणीय जनजागरूकता के कार्यों से जुड़ी हुई हैं। पदयात्राओं और पौधारोपण की जानकारी दी शिप्रा ने रक्षा मंत्री को अपनी अब तक की प्रमुख पर्यावरणीय गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने अयोध्या से रामेश्वरम् तक की लंबी पदयात्रा सहित देश की अनेक नदियों के तटों पर जनजागरण अभियान चलाया है। साथ ही उन्होंने बताया कि पंचतत्त्व संस्था के एक करोड़ वृक्षारोपण संकल्प के अंतर्गत देश के कई राज्यों में लाखों पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश अब वृक्ष बन चुके हैं। रक्षा मंत्री द्वारा शिप्रा से इन यात्राओं के माध्यम से संस्था के उद्देश्यों के बारे में पूछने पर उन्हें बताया कि इन नदी जंगल क्षेत्र में की जाने वाली यात्राओं से वह धार्मिक एवं आध्यात्मिक जागरण के साथ पर्यावरण जागरण करती है जिसके द्वारा लोगों को छोटे छोटे समूह में एकत्र कर नदी,जंगल,जल के संरक्षण के लिए उनके प्रति इनका महत्व बताकर संकल्पित किया जाता है।अयोध्या से रामेश्वरम जैसी अद्भुत यात्रा के बारे में पूछने पर शिप्रा ने बताया कि लगभग 4000 किमी लंबे इस बनवास मार्ग में श्रीराम ने भारत की मुख्य नदिया जैसे गंगा,यमुना,सरस्वती,नर्मदा,तुंगभद्रा,गोदावरी,वाईगई आदि का स्पर्श किया जिसके द्वारा उन्होंने आज की पीढ़ी को यह संदेश दिया कि अपने जीवन को बचाने के लिए नदियों को बचाना आवश्यक है।उसी मार्ग पर निकलकर उस रामतत्व को उन नदियों के पास जाकर उनका स्पर्श करके ही समझा जा सकता है।इस यात्रा के माध्यम से लोगों को यह समझाने का भी प्रयास किया कि राम को पूजने वाले को उनकी प्रिय नदियों को,उनके प्रिय पर्वतों को,उनके प्रिय जंगलों को भी पूजना होगा।
शिप्रा ने इस अभियान की प्रमुख झलकियों को समेटते हुए एक विशेष पत्रिका भी रक्षा मंत्री को भेंट की, जिसमें पंचतत्त्व द्वारा किए गए विविध पर्यावरणीय कार्यों और जनभागीदारी को चित्रों और तथ्यों के साथ प्रस्तुत किया गया है।रक्षा मंत्री ने सराहा, कहा—“भविष्य की धरोहर हैं ये यात्राएं” करीब एक घंटे से अधिक समय तक चले संवाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शिप्रा पाठक की पदयात्राओं, नदी संरक्षण और वृक्षारोपण अभियानों की सराहना करते हुए कहा कि “यह प्रयास न केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक अमूल्य धरोहर के रूप में संरक्षित किए जाएंगे।” उन्होंने पंचतत्त्व संस्था की गतिविधियों को सराहते हुए कहा कि पर्यावरण के क्षेत्र में यह कार्य राष्ट्रहित से जुड़ा हुआ है और सरकार ऐसी लोक सहभागिता को सदैव प्रोत्साहित करती है। उन्होंने संस्था के प्रति हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।उन्होंने कहा कि शिप्रा जैसे युवाओं का इस तरह से आगे आना देश के लिए एक सार्थक संदेश है।उन्होंने कहा कि पर्यावरण के लिए शिप्रा जैसे युवाओं को आगे आना होगा जिससे आने वाले जल संकट से सामना कर सकें। आदि गंगा गोमती पर चर्चा से हुए प्रभावितशिप्रा पाठक ने रक्षा मंत्री को उनके संसदीय क्षेत्र लखनऊ से होकर बहने वाली आदि गंगा गोमती के प्रति जागरूकता हेतु की गई भारत की प्रथम पदयात्रा के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस यात्रा के दौरान गोमती के किनारे एक विशेष स्थल पर, जो एक ही अक्षांश (Latitude) पर स्थित है, दिव्य शिवालय की स्थापना भी की गई है। यह स्थल गोमती की सांस्कृतिक महत्ता को पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।शिप्रा ने बताया कि मैं अपने संवादों में लोगों को समझती हूं हर कार्य सरकार का नहीं है।हम लोगों को अपनी पर्यावरण के प्रति नैतिक जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी।सरकार अपना कार्य कर रही है हमें भी अपना कार्य करना चाहिए। इस पहल से रक्षा मंत्री विशेष रूप से प्रभावित दिखे और उन्होंने कहा कि नदियों की सांस्कृतिक पुनर्प्रतिष्ठा समय की मांग है। सिंदूर के पौधे से जुड़ा संदेश इस मुलाकात की विशेष बात रही शिप्रा पाठक द्वारा रक्षा मंत्री के आवास पर सिंदूर का पौधा रोपित करना। यह पौधा भारतीय संस्कृति में स्त्रीत्व, शक्ति और मंगल का प्रतीक माना जाता है। शिप्रा ने इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के प्रतीक रूप में समर्पित किया। इस प्रतीकात्मक कार्य के माध्यम से उन्होंने नारी चेतना, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र सेवा—तीनों भावों को एक साथ जोड़ा। नागरिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण शिप्रा पाठक का यह प्रयास एक साधारण नागरिक द्वारा असाधारण भूमिका निभाने का उदाहरण है। उनके कार्य यह दर्शाते हैं कि भारत की नदियाँ, वृक्ष, और सांस्कृतिक धरोहरें केवल भौगोलिक या धार्मिक अवधारणाएँ नहीं हैं, बल्कि एक जीवंत परंपरा का हिस्सा हैं, जिन्हें संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक ज़िम्मेदारी है। रक्षा मंत्री से उनकी यह मुलाकात इस बात का प्रमाण है कि जब नागरिक समाज और शासन-तंत्र एक साथ आते हैं, तो पर्यावरण और संस्कृति की रक्षा का मार्ग और भी सशक्त होता है।

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