चित्रकूट। परमहंस संत रणछोड़दास जी महाराज द्वारा जानकीकुंड स्थित रघुबीर मन्दिर आश्रम बड़ी गुफा से प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी चित्रकूटधाम चौरासी कोसीय परिक्रमा यात्रा का शुभारंभ हुआ। यह यात्रा चित्रकूट धाम के विभिन्न पवित्र स्थानों पर होती हुई, ग्यारह दिवसों में समापन करेगी। ट्रस्टी डॉ बीके जैन ने इस अवसर पर बताया कि इस चौरासी कोसीय परिक्रमा के अन्तर्गत प्रतिवर्ष भारत भर के विभिन्न प्रान्तों से आये पूज्य सन्त-महन्त एवं परिक्रमा यात्री सम्मिलित होते हैं एवं फाल्गुन शुक्ल द्वितीया से प्रारम्भ होकर फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी तक यह यात्रा भगवान राम के वनवास काल के पदचिन्हों पर चलते हुए चित्रकूट धाम के मध्यप्रदेश एवं उत्तरप्रदेश में स्थित सीमावर्ती अंचल में महत्वूर्ण तीर्थस्थलों का पैदल दर्शन कर पुनः रघुबीर मन्दिर परिसर में धूमधाम से समापन को प्राप्त होती है। इस वर्ष भी परिक्रमा हेतु हजारों की संख्या में संत एवं गृहस्थ पूरी आस्था के साथ जुड़े हैं। सभी श्रद्धालों को भोजन प्रसाद तथा दक्षिणा देकर, तिलक लगाकर आदरपूर्वक परिक्रमा हेतु भगवान हनुमान का प्रतीक ध्वज के साथ कोतवाल संतों के निर्देशन में प्रस्थान करवाया गया। कार्यक्रम में पूज्य संत सीताशरण महाराज, फलहारी महाराज, नागा पंजाबी भगवान, राघवशरण पुजारी, के साथ ट्रस्टी डॉ बीके जैन, उषा जैन, आर बी सिंह चौहान, आचार्य अनिल शास्त्री एवं गुरुकुल के आचार्य एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।