आदिवासी समाज से सीखना होगा सहजीवन का पाठ – डॉ. राजाराम त्रिपाठी

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कोलकाता। जनजातीय साहित्य के पुरोधा एवं जैविक कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने कहा कि उच्च शिक्षा के सभी विद्यार्थियों, विशेष रूप से आईएएस अभ्यर्थियों और साहित्य के छात्रों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण (इंटर्नशिप) अनिवार्य किया जाना चाहिए। वे “नई शिक्षा नीति: हिंदी साहित्य में प्रायोगिक प्रशिक्षण का महत्व” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इस कार्यक्रम का आयोजन पैरोकार पत्रिका और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल-बायो साइंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (IBRAD) द्वारा किया गया था। डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि प्रशासनिक सेवाओं में आने वाले युवाओं को केवल प्रशासनिक दक्षता नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना का व्यावहारिक ज्ञान भी दिया जाना चाहिए। उन्होंने पर्यावरण संकट की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, “आधुनिक समाज ने धरती, वायु और जल को इतना प्रदूषित कर दिया है कि अब मानव सभ्यता के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। विकास की अंधी दौड़ में हमने इस खूबसूरत नीले ग्रह को रहने योग्य नहीं छोड़ा है। अगर हमें मानवता को बचाना है, तो हमें अपने बचे-खुचे आदिम पूर्वजों, अर्थात् आदिवासी समाज से प्रकृति और पर्यावरण के साथ सहजीवन के मूल मंत्र सीखने होंगे।”
हिंदी साहित्य में इंटर्नशिप का महत्व : इस संगोष्ठी में IBRAD के चेयरमैन प्रो. एस.बी. राय ने कहा कि हिंदी साहित्य में इंटर्नशिप की अवधारणा को समझाने के लिए शिक्षकों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन आवश्यक है। उन्होंने कहा, “हमें हिंदी साहित्य की पारंपरिक धारणा से बाहर आना होगा। अक्सर लोग साहित्य को केवल कविता, कहानी, उपन्यास और निबंध तक सीमित कर देते हैं, जबकि संचार कौशल (कम्युनिकेशन स्किल) का मूल स्रोत साहित्य ही है। प्रबंधन (मैनेजमेंट) के छात्रों को कम्युनिकेशन स्किल सिखाई जाती है, लेकिन यह कौशल साहित्य से ही उपजती है।”
इस संगोष्ठी में विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर रेशमी पांडा मुखर्जी ने साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में इंटर्नशिप के महत्व को समझाया। वहीं, विद्यासागर कॉलेज फॉर वुमेन के सहायक प्राध्यापक अभिजीत सिंह ने अनुवाद, कंटेंट राइटिंग, फिल्म लेखन और दक्षता विकास में हिंदी साहित्य की प्रायोगिक भूमिका को विस्तार से प्रस्तुत किया।
योगेशचंद्र चौधरी कॉलेज की सहायक प्राध्यापिका ममता त्रिवेदी ने कहा, “साहित्य में इंटर्नशिप को केवल रोजगार प्राप्त करने से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। साहित्य मानवता से जुड़ा है। जब किसी व्यक्ति में मानवता विकसित होगी, तो वह न केवल रोजगार पाने में सक्षम होगा, बल्कि एक बेहतर समाज बनाने में भी योगदान देगा।”
पैरोकार साहित्य महोत्सव में सम्मान और प्रतियोगिताएं : संगोष्ठी के दौरान “डिजिटल युग में सामाजिक संबंधों के नए रूप” विषय पर एक राष्ट्रीय हिंदी निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 36 छात्रों ने भाग लिया।अभिषेक कोहार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।शालिनी पांडेय ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।नंदिनी कुमारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।इन्हें IBRAD की ओर से प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
डॉ. राजाराम त्रिपाठी को ‘पैरोकार साहित्य शिखर सम्मान’ से नवाजा गया
इस दो दिवसीय पैरोकार साहित्य महोत्सव में छत्तीसगढ़ से पधारे डॉ. राजाराम त्रिपाठी को “पैरोकार साहित्य शिखर सम्मान” से सम्मानित किया गया। अन्य प्रमुख सम्मानित व्यक्तित्वों में डॉ. मोहम्मद आसिफ आलम (पैरोकार नाट्य सम्मान),शंकर जालान (पैरोकार पत्रकारिता सम्मान),सीमा गुप्ता (पैरोकार काव्य सम्मान)
महोत्सव के दौरान पैरोकार पत्रिका के विशेषांक का लोकार्पण, आज की साहित्यिक पत्रकारिता पर संगोष्ठी, कवि सम्मेलन और राष्ट्रीय संगोष्ठी जैसे महत्वपूर्ण आयोजन किए गए। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता ताजा टीवी और ‘छपते छपते’ के प्रधान संपादक विश्वंभर नेवर ने की, जबकि समापन सत्र की अध्यक्षता IBRAD के चेयरमैन प्रो. एस.बी. राय ने की। यह दो दिवसीय महोत्सव साहित्यिक पत्रकारिता, पर्यावरण संरक्षण और व्यावहारिक शिक्षा के महत्व को उजागर करने वाला एक प्रेरणादायक आयोजन साबित हुआ।

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