जब जब होई धरम की हानी, बारहि असुर अधम अभिमानी

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शाहजहांपुर। मुमुक्षु महोत्सव के में चल रही श्री राम कथा के चौथे दिन का शुभारंभ श्री राम स्तुति एवं श्री हनुमान चालीसा के साथ हुआ। कथा को आगे बढ़ाते हुए कथा व्यास श्री विजय कौशल जी महाराज ने सुनाया कि जब माता पार्वती ने भगवान शिव से यह प्रश्न किया कि ईश्वर तो निर्गुण, निराकार एवं अव्यक्त है तो फिर क्या कारण है कि उस निर्गुण को सगुण, निराकार को साकार एवं अव्यक्त को व्यक्त होना पड़ा। तब भगवान शंकर उन्हें प्रभु के कई जन्मों की कथा सुनाते हुए कहते हैं-
“जब जब होई धरम की हानी
बारहि असुर अधम अभिमानी
तब तब धर प्रभु विविध शरीरा
हरहि दयानिधि सज्जन पीड़ा”

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इसके उपरांत कथाव्यास ने नारद मोह की कथा का बड़े मनमोहक अंदाज में वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब नारद हिमालय पर तपस्या कर रहे थे तो भगवान इंद्र को लगा कि कहीं वे तपस्या करके उनका पद न प्राप्त कर लें, इसलिए इंद्र ने कामदेव को नारद मुनि की तपस्या भंग करने का आदेश दिया। कामदेव ने नारद पर कामुक बाण चलाए किंतु नारद विचलित नहीं हुए। तब कामदेव ने कहा कि हे नारद मुनि, आप तो भगवान शिव से भी बड़े सन्यासी हो गए हैं। ऐसा सुनकर नारद को अहंकार हो गया। उनके अहंकार का नाश करने के लिए भगवान विष्णु ने अपनी माया से एक नगर बसाया, जिस पर शीलनिधि का शासन था। शीलनिधि की पुत्री विश्वमोहिनी के स्वयंवर में भगवान विष्णु ने नारद को हरिरूप (बंदर का चेहरा) दे दिया। परिणाम यह हुआ कि स्वयंवर में नारद उपहास के पात्र बने। इस पर नारद मुनि ने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि उन्हें मनुष्य शरीर धारण करके 14 वर्ष तक स्त्री वियोग में भटकना पड़ेगा और पत्नी को खोजने में बंदर ही उनकी मदद करेंगे।कथा व्यास ने कहा कि गुरु निंदा से बड़ा कोई पाप नहीं है। इसके उपरांत उन्होंने मनु व शतरूपा के प्रसंग का वर्णन किया। उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए भजन “चलो रे मन श्री वृंदावन धाम रटेंगे राधा राधा नाम मिलेंगे कुंज बिहारी” पर भक्तगण झूमते हुए नृत्य करने लगे। कथा का समापन आरती के साथ हुआ। पूजन व आरती में जगदीश प्रसाद अग्रवाल, मीरा अग्रवाल, सुमन अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल, रागिनी अग्रवाल, द्रौपदी अग्रवाल, मनु अग्रवाल, राजीव मोहन पांडेय, अरुण खंडेलवाल एवं अंजू खंडेलवाल, रचित अग्रवाल, रोहित सिंह, नरेंद्र सेठ, पूनम सेठ, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी वरुण सिंह, विभाग प्रचारक धर्मेंद्र धवल आदि उपस्थित रहे। प्रसाद वितरण में डॉ देवेंद्र सिंह, हरीश चंद्र श्रीवास्तव एवं डॉ विनीत श्रीवास्तव का योगदान रहा। संचालन डा. अनुराग अग्रवाल ने किया। आयोजन में डॉ राम शंकर पांडेय, डॉ राजीव कुमार, डॉ सुजीत वर्मा, अखिलेश तिवारी, डॉ रूपक श्रीवास्तव, धर्मवीर सिंह, दीपक साहू आदि का विशेष सहयोग रहा।

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