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Uttar Pradesh

उर्स ए फरीदी के मौके पर शानदार तरही मुशायरे में शायरो ने पढ़े उम्दा कलाम

February 26, 2025By admin0 comments
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बदायूं। हर साल की तरह इस साल भी बाबा फरीद के पोते कुतबे बदायूं मुफ्ती शाह मोहम्मद इब्राहिम फरीदी का दो रोज़ा सालाना उर्स ए फरीदी का आगाज़ सुबह बाद नमाजे फज्र कुरआन ख्वानी से हुआ। दोपहर में 11वीं शरीफ की न्याज़ हुई। जिसके बाद शाम 4:00 बजे चादर शरीफ का जुलूस मोहल्ला कामांगरान स्थित खानकाहे फरीदिया से दरगाह पहुंचा। जिसमे अकीदतमंदो ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। बाद नमाजे इशा साहिबे सज्जादा खानकाह आबादानिया, फरीदिया बदायूं शरीफ, हज़रत मोहम्मद अनवर अली फरीदी (सुहैल फरीदी) साहब की सदारत में महफिल मिलाद शरीफ के बाद तरही मुशायरे का आयोजन किया गया । रात्रि दो बजे तक चले मुशायरे में जनपद, गैर जनपद,गैर प्रांत के शोअरा हज़रात द्वारा नात ओ मनकबत पेश की गई।

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सज्जादा हज़रत मोहम्मद अनवर अली सुहैल फरीदी ने फरमाया-
उनके शैदा की आजाब शान है रब शाहिद है,
हाथ मिट्टी को लगा दे तो वह सोना हो जाए।

उस्ताद शायर डॉ मुजाहिद नाज़ बदायूंनी ने कहा-
जीते जी मुझसे कोई काम तो ऐसा हो जाये,
हश्र में जो मेरी बख्शिश का जरिया हो जाये।

अहमद अमजदी ने पढ़ा-
वह अगर चाहे तो दीदारे मदीना हो जाये,
बैठे-बैठे ही यहीं मुझको नज़ारा हो जाये।

शम्स मुजाहिदी बदायूंनी ने कहा-
मूंह दिखाने का सरे हश्र बहाना हो जाये,
सिर्फ इक बार मदीना मिरा जाना हो जाये।

ई० वारिस रफी ने कहा-
ऐ खुदा तेरा अगर अदना इशारा हो जाये,
परचमे दीने मोहम्मद यहां ऊंचा हो जाये।

मीरानपुर कटरा के मु०सलीम खां सलीम ने पढ़ा-
एक पल में ही इलाजे गमे दुनिया हो जाये,
जिस पे पड़ जाए नजर उनकी वो अच्छा हो जाये।

शहज़ादे सुहैब फरीदी ने सुनाया –
मेरे मौला कभी ऐसा भी करिश्मा हो जाये,
हिंद में बैठें तैबा का नजारा हो जाये।
दिल्ली से आए राकिम देहलवी ने पढ़ा –
उनके तसव्वुरात का आलम न पूछिए,
अब सारी कायनात मेरी चश्मेतर में है।

अनवर फरीदी ने पढ़ा-
कौन सी शय है जो इंकार करें उनके करम से,
जो भी दामन में लिपट जाए वह अपना हो जाये।

उस्मान आबिद जलालपुरी ने कहा –
सब जानते हैं राज ये सबकी नजर में है,
खुशबू ये किसके प्यार की दामने तर में है।

अब्दुल जलील फरीदी ने पढ़ा-
काश अपना ले मुसलमा जो उसूले इस्लाम,
सबसे ऊंचा यहां इस्लाम का झंडा हो जाये।

सऊद फरीदी ने पढ़ा-
उनकी रहमत की नजर हो तो मुकद्दर चमके,
बंद दरवाजा भी किस्मत का कुशादा हो जाये।

इनके अलावा हाफ़िज़ मुकर्रम,सगीर सैफी, मुही बख्श क़ादरी, नईम शाहजहांपुरी, मोहम्मद हसन कादरी, हाफिज नईम, मोहम्मद तालिब, अब्दुल कयूम फरीदी, मोहम्मद नाजिम उरौलवी, मोहम्मद आतिफ, अयूब अली, मोहम्मद नईम, फैज फरीदी, आरिश फरीदी, नाजिम आदि ने भी कलाम पेश किए। मुशायरे की निजामत (संचालन) मशहूर उस्ताद शायर डॉ मुजाहिद नाज़ क़ादरी बदायूंनी ने की।

आखिर में सलातो सलाम के बाद मुल्क व कौम की तरक्की और खुशहाली के लिए दुआ की गई। सभी को तबर्रुक तकसीम किया गया।

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