संत सम्मलेन और विशाल भंडारे के साथ प्राण प्रतिष्ठा समापन समारोह हुआ

पीलीभीत। आज परम अक्रिय धाम स्थित लकेश्वर नाथ मंदिर में भगवान शिव की विशाल शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा का पांच दिवसीय कार्यक्रम मंत्रोचार महारुद्राभिषेक और भक्तों के लिए भंडारे के अनुकू के भजन के साथ समापन हुआ। देश के सभी अखाड़ों से आए हुए संतों और महामंडलेश्वरों ने कहा कि स्वीकृत आनंद जी ने पीलीभीत में ही महाकुंभ की स्थापना कर दी है लकेश्वर महादेव की स्थापना के साथ ही यह अक्रिय परमधाम अत्यंत पवित्र और सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला स्थान बन गया है उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति यहां पर जिस भी अच्छी कामना के साथ आएगा उसकी कामना अवश्य पूर्ण होगी ऐसा हम सभी का मानना है क्योंकि लकेश्वर महादेव कभी किसी को निराश नहीं करते हैं। सभी महामंडलेश्वरों ने स्वयं प्रवक्तानंद जो की महामंडलेश्वर हैं उनकी भूरी भूरी प्रशंसा की और उनका आशीर्वाद दिया। आचार्य ज्ज्ञान देव सिंह जी ने बताया कि आचार्य महामंडलेश्वर साक्षी महाराज ने उनसे कहा की स्वामी प्रवक्तानंद महामनडालेश्वर के पद के योग हैं तो उन्होंने सभी 13 अखाड़ओं कों साथ लेकर स्वामी प्रवक्तानंद कों महंडलेश्वर की उपाधि से विभुषित किया। 13 फरवरी से शुरू हुए इस कार्यक्रम में लगातार धार्मिक प्रशासनिक और राजनीतिक हस्तियों का आने का डाटा लगा रहा लेकिन देखने वाली बात यह रही की बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय और दूसरे जिलों से भी सनातनी इस कार्यक्रम में उपस्थिति दर्ज कराने पूरी श्रद्धा के साथ आए। आज सुबह से ही यज्ञ के साथ प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम प्रारंभ हुआ जिसमें सभी यजमान स्वामी प्राप्त आनंद महामंडलेश्वर देश के विभिन्न हिस्सों से आए हुए बड़े-बड़े आचार्य एवं आमजन उपस्थित हुए। प्राण प्रतिष्ठा के दौरान विशाल शिवलिंग की भी दूध शहद पंचामृत इत्र मेवा आदि अनेक पदार्थ से स्नान के उपरांत उनका श्रृंगार किया गया और वैदिक मित्रों के साथ सभी देवी देवताओं का आवाहन किया गया इस कार्यक्रम के दौरान विशेष प्रकार की देवी अनुभूतियां उपस्थित भक्तों को हुई।
कार्यक्रम के आयोजन महामंडलेश्वर विधायक बरखेड़ा स्वामी प्रवक्तानंद जी ने प्रधान यजमान अमृतलाल व उनकी पत्नी को साथ शिवलिंग की विशेष पूजा अर्चना कराई जबकि अन्य 24 यजमान मंत्रोचार के साथ ही पुष्प आदि की वर्षा शिवलिंग पर करते रहे। सभी आचार्यों व भक्तों ने जय घोष के साथ अलखेश्वर महादेव का आवाहन किया और उनसे सभी जीवो पर कृपा बनाए रखने और उनके कासन को हारने की प्रार्थना की। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद सभी यजमानों को प्रसाद वितरण हुआ और फिर सभी मंदिर से प्रांगण में ही स्थित सत्संग स्थल पर पहुंचे जहां तेरे अखाड़े के महामंडलेश्वर व अन्य संत उपस्थित रहे थे जिन्होंने अपने अमृतवाणी से सभी के जीवन जीवन को धन्य किया। महामंडलेश्वर प्रवक्तानंद ने बताया के प्रधान यजमान अमृतलाल अग्रवाल पीलीभीत ही नहीं दूर-दूर तक दिव्यांगों में जरूरतमंदों की निशुल्क सेवा के लिए जाने जाते हैं उन्होंने इसी कारण से उन्हें प्रधान यजमान नियुक्त किया क्योंकि उनके जितना जरूरतमंदों की सेवा करने वाला दूसरा कोई आसपास नहीं है अमृतलाल अकेले ऐसे व्यक्ति हैं जो हर महीने की 12 तारीख को कम से कम 500 जरूरतमंदों की निशुल्क सेवा करते हैं। उनके दांतों के आंखों के हृदय की निशुल्क जांच और चिकित्सा करते हैं साथ ही साथ दिव्यांगों को दिव्यांग उपकरणों का वितरण करते हैं और ऐसा कार्य करने वाला ऐसा कोई दूसरा व्यक्ति उनकी नजर में नहीं है।आज के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हरिद्वार और प्रयागराज सहित अन्य धार्मिक स्थलों से आए संतों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंतिम दिन प्राण प्रतिष्ठा संपन्न होने के उपलक्ष में संत सम्मेलन किया गया। जिसमें देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों से आए महामंडलेश्वरों के द्वारा प्रवचन सुनाए गए। साथ ही संतो को शाल और बर्तन भेंट कर सम्मानित भी किया गया। महामंडलेश्वर स्वामी प्रवक्तानंद के द्वारा आयोजित किए गए इस प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में वृंदावन मथुरा से आई कलाकारों की टीम ने रात में कृष्ण लीलाओं का मंचन किया। जिसको देखने के लिए दूर दराज से लोग आश्रम पहुंचे। जिसमें निर्मल अखाड़े के मुखिया महंत लक्ष्मण सिंह शास्त्री, जोधपुर से महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञान स्वरूपानंद अक्रिय, संगरूर पंजाब से महंत मलकीत सिंह, वृंदावन के हरी निकुंज आश्रम से महंत अमनदीप सिंह, निर्मल अखाड़े के हरिद्वार के महंत निर्भय सिंह, प्रयागराज से महंत राजेंद्र सिंह, अमृतसर पंजाब से महंत हरिजोत सिंह, सी…