उर्स नियाज़ी का हुआ बड़ा कुल शरीफ ,जुलूस – ए- चादरशान-ओ-शौकत के साथ निकला

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बरेली । खानकाहे नियाज़िया में जारी दस रोजा उर्स कुतबे आलम हज़रत किबला शाह नियाज़ अहमद रअ के कुल शरीफ के मौके पर खानकाहे नियाज़िया में खचाखच भरे हाल नूर महफिल खाने और आसपास की इमारतों में लोग शरीक हुए और कुतबे आलम के हुजूर नजरान अकीदत पेश किया। ठीक 02ः10 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गयी। लोगों को तबर्रूक हासिल करने के लिए घण्टांे इन्तेजार करना पड़ा। शाम 4ः30 बजे चादरों का जुलूस जनाब जुनैदी मियां नियाज़ी की क़यादत में कुलहाड़ापीर से उठा। इस मौके पर मौलाना कासिम नियाज़ी ने कुतबे आलम की हयात, करामात और तालीमात पर तफसील से रोशनी डाली। वहीं पुराने शहर से जुलूस डॉ कमाल मियां नियाज़ी की सदारत में उठा और शहर के कई इलाकों से जुलूस उठकर नौमहला पर एक होकर अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ खानकाहे नियाज़िया पहुंचा। जुलूस का पूरे रास्ते स्वागत किया गया। जहां से भी जुलूस गुज़रा, रास्ते को फूलों की बारिश से पाट दिया गया। तमाम जगह पानी शर्बत की सबीलें लगाई गयी और मिठाईयां तकसीम की गयी। जुलूस जब शाम को खानकाहे नियाज़िया पहुंचा तो सज्जादानशीन हज़रत अलहाज मेंहदी मियां खानकाह के साहबजादगान के साथ जुलूस का स्वागत किया गया व इनकी मौजूदगी में मज़ारात पर चादरें पेश की गयीं। उसके बाद खानकाह शरीफ में दावतेखास का एहतेमाम किया गया। जिस में शहर के तमाम मोअज्जेजीन और आफीसरान ने शिरकत की।

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रात को महफिल का नज़ारा काबिले दीद था। हिन्दुस्तान के नामचीन कव्वालें ने सूफिया कलाम पेश करके पूरी माहौल को सूफियाना रंग में रंग दिया। लोग घण्टों अपनी जगह से नहीं हिले, ठीक 1ः00 बजे हज़रत सज्जादानशीन मसनद पर तशरीफ लाये। उसी वक्त खानकाह शरीफ में तिल भर भी जगह नहीं थी। सड़कों पर खडे़ होकर हज़रत सज्जादानशीन के दीदार को बेताब दिखे। सज्जादानशीन हज़रत महेंदी मियाँ निज़ामी नियाज़ी साहब अपने खानदानी शाही लिवास में मसनद पर तशरीफ लाये। कव्वालों ने बारी-बारी हाजरी दी। ठीक 2ः30 बजे कुल शरीफ पढ़ा गया। उसके बाद खानकाही चौकी ने चिश्तिया रंग पढ़ा। बाद में मज़ारात पर सलामी के वक्त कड़का पढ़ा गया। खुसूसी दुआ की गयी। खास तबर्रूक तकसीम किया गया। कुल में दीगर दरगाहों के सज्जादगान की तशरीफ रही, जिसमें अजमेर शरीफ, निज़ाम उद्दीन औलिया दिल्ली, कुतुब साहब और दीगर खानकाहों की मौजूदगी रही। हिन्दुस्तान और विदेश से आये फनकारों ने भी हाजरी दी। आखिर में हल्क-ए-ज़िक्र के साथ छठी शरीफ की तकरीबात का इखतेमाम हुआ।

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