मुर्गियों में उभरती बीमारियों को लेकर दो दिवसीय कार्यशाला

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बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसन्धान संस्थान (आईवीआरआई )के पैथोलॉजी विभाग में “पशुओं और मुर्गियों में उभरती बीमारियों के पैथोलॉजिकल निदान के लिए उन्नत प्रोद्योगिकियों पर डीएसटी-एसईआरबी प्रायोजित उच्च स्तरीय कार्यशाला शुरू की गई। इस दस दिवसीय कार्यशाला में देश के 12 राज्यों के विभिन्न विश्वविद्यालयों के परास्नातक और डॉक्टरेट डिग्री के छात्रों सहित 20 प्रतिभागियों ने भाग लिया। संयुक्त निदेशक (केडराड ), डॉ के पी सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में, डॉ एस के सिंह (संयुक्त निदेशक-शोध ), डॉ जी साईकुमार (प्रभारी पीएमई सेल) और डॉ आरवीएस पवैया, विभागध्यक्ष, पैथोलॉजी विभाग ने कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में भाग लिया।कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए, डॉ के पी सिंह ने कार्यशाला के विषय की सराहना की और प्रतिभागियों से सक्रिय भागीदारी और अनुभवी वैज्ञानिकों के साथ विचार विमर्श करने का आग्रह किया, ताकि उन्हें विभिन्न निदान तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं के संदर्भ में अधिकतम ज्ञान प्राप्त हो सके। डॉ एस के सिंह, संयुक्त निदेशक (शोध ) ने पशुओं की बीमारीयों को नियंत्रित करने और किसानों को उत्पादन में नुकसान को कम करने के लिए पशु रोगों के प्रारंभिक और सटीक निदान के महत्व पर जोर दिया।

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पीएमई सेल के प्रभारी डॉ जी साईकुमार ने ‘वन हेल्थ’ की अवधारणा को संक्षेप में समझाया और बताया कि कोविड-19 जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने या उन्मूलन में वन हेल्थ दृष्टिकोण बहुत महत्वपूर्ण है। विभागध्यक्ष, पैथोलॉजी विभाग डॉ आरवीएस पवैया,ने प्रतिभागियों को पूर्ण समर्पण के साथ विभिन्न नैदानिक तकनीकों को सीखने और अपने थीसिस शोध कार्य को डिजाइन करने में इन्हें शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यशाला के पाठ्यक्रम निदेशक, डॉ विद्या सिंह ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को पशुओं में उभरती बीमारियों के निदान के लिए विभिन्न पैथोलॉजिकल (पारंपरिक और उन्नत) और आणविक तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है। यह कार्यशाला नैदानिक तकनीकों जैसे हिस्टोपैथोलॉजी, सेल साइटोलॉजी, एफएटी, आईएचसी, एलिसा, आणविक तकनीक जैसे पीसीआर, रियल-टाइम पीसीआर, पीएजीई, फ्लो साइटोमेट्री, इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी आदि पर जानकारी देने के लिए विभिन्न प्रकार के विषयों को कवर करेगी। इसके अलावा, प्रत्येक तकनीकी सत्र को एक परिचयात्मक भाग के रूप में डिज़ाइन किया गया है ताकि छात्र तकनीक के मूल सिद्धांतों को समझ सकें और उसके बाद प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकें। माइक्रोबायोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, पैथोलॉजी, फिजियोलॉजी, परजीवी विज्ञान और जनपादिक रोग विज्ञान जैसे विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता वाले वक्ता इस कार्यशाला में अपने व्याख्यान देंगे।कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में डॉ आर. सिंह (सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष, पैथोलॉजी विभाग), डॉ बीआर सिंह (, डॉ पुष्पेंद्र कुमार, डॉ एस ई जाधव, डॉ यशोथा टी, डॉ एम करिकालन, डॉ चंद्रकांत जाना, डॉ पवन कुमार, डॉ अशोक कुमार आदि और पैथोलॉजी विभाग के छात्र शामिल हुए।

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