बरेली में गमगीन माहौल में दफन हुए ताजिए,इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद
बरेली। 10 दिन तक सुन्नी समुदाय और शिया समुदाय द्वारा ताजियादारी करने के बाद आज मोहर्रम की दसवीं तारीख को कर्बला में गमगीन माहौल में ताजिए दफन किए जाते हैं इसके पीछे धार्मिक रिवायत यह है के पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासो की शहादत हुई थी उन्होंने झूठ का साथ कतई न दिया और हक और ईमान के लिए अपनी प्राणों की बलि दे दी आज मोहर्रम की 10 तारीख है आज के दिन कर्बला में ताजिए दफन किए जाते हैं और खामोशी के साथ ताजिओ पर चढ़ी हुई सजावट को दफन किया जाता है और आज जगह-जगह हजरत इमाम हुसैन की याद में साबिर के लंगर लगाए गए और लोगों को शरबत तकसीम किया गया पूरे शहर से ताजिए या हुसैन या

हुसैन सदा के साथ कर्बला पहुंचे और दफन करने की प्रक्रिया शुरू हुई करबला कमेटी के लोगों ने भी ताजियों का स्वागत किया और व्यवस्था को संभाल बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स पुलिस अधिकारी कर्बला में मौजूद रहे सामाजिक संगठनों ने जगह-जगह खाने-पीने की वस्तुओं का वेतन की व्यवस्था की । आज बाकरगंज में दसवें मोहर्रम पर मेला लगाया गया। जिसमें शहर और गांव के लोग काफी तादाद में लोग पहुंचे। वहीं शहर के विभ्भिन इलाकों में उलेमा ने मोहर्रम व कर्बला के पहलुओं पर तकरीरे दीं। इसके बाद दुआ की गईं। मोहर्रम की दस तारीख को बाकरगंज स्थित ईदगाह कर्बला में शहर के चारों तरफ से करीब २५० से ज्यादा जुलूस पहुंचें।

बता दें कि सुन्नी समुदाय के लोग जुलूस में अलम, तख्त और छड़े लेकर कर्बला पहुंचते है । इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मोहर्रम पर ताजियों का जुलूस निकाले जाने को लेकर इस बार जिले भर में कड़ी चौकसी है। शहर से लेकर देहात तक जुलूस में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। जुलूस के आगे और पीछे पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और अधिकारियों का काफिला चलता रहेगा। शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। आज दिन भर ताजियों का जियारत का सिलसिला चलता रहा। वहीं शाम के करीब ताजियों को बाकरगंज कर्बला समेत अन्य जगहों की कर्बला में सुपुर्द ए खाक किया गया।













































































