मौजूदा संक्रमण काल में उदारीकरण नीति अपनानी चाहिए

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लखनऊ / बदायूँ । कोरोना से हुई मौतों व गम्भीर बीमारी से गुजर रहे प्रधानाचार्य व शिक्षकों ने सरकार से कानूनी कार्यवाही की जगह उदार रवैया अमल में लाए जाने की गुहार लगाई है । उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद ने जगह जगह कानूनी कार्यवाही के कारण शिक्षकों में मानसिक तनाव बढ़ने व शरीर में कोरोना वायरस से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता कम होने की का तर्क दिया है ।
मुख्यमंत्री सहित उपमुख्यमंत्री , चुनाव आयुक्त व प्रशासनिक अधिकारियों के नाम खुला पत्र जारी करते हुए उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा ने सूबे कोरोना के कारण हुई अनेक शिक्षा अधिकारियों , प्रिंसिपलों व शिक्षकों की असमय मौत पर चिंता व्यक्त की है । संयोजक डॉ विश्व नाथ दुबे ने वायरस की चपेट में आ चुके अनेक प्रधानाचार्यों व शिक्षकों से जबरन चुनाव ड्यूटी करबाने को दुर्भाग्यपूर्ण कहा । वहीं महामंत्री डॉ मनोज कुमार ने गम्भीर लोगों द्वारा ड्यटी न कर पाने पर उनके विरुद्ध एफआईआर व निलम्बन की कार्यवाही को वर्तमान समय में अविवेकपूर्ण प्रशासनिक रवैये को गलत बताया है ।
परिषद ने मांग की है कि सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों सहित विभागीय अधिकारियों को मौजूदा संक्रमण काल में उदारीकरण नीति अपनानी चाहिए । उन्होंने आकस्मिक मौतों की जांच कराके वास्तव में दोषियों के विरुद्ध कारवाही की मांग की है , न कि बीमार प्रिंसिपल व शिक्षकों के विरुद्ध । परिषद ने विपरीत परिस्थितियों में हुई गलतियों को फिलहाल नजरअंदाज करने की अपील पत्र में जारी की है । ध्यान रहे कि विभिन्न जनपदों में चुनाव को लेकर प्रिंसिपल व शिक्षकों को डराने , धमकाने व कार्यवाही के मामले सामने आने बाद पीड़ित के मानसिक स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है । जिसको परिषद के संज्ञान में लाने के बाद पत्र जारी किया गया है ।

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