रमजान के पाक माह का हुआ आगाज ,रखा गया पहला रोजा

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सहसवान (बदायूं ‌)। रमजान के पाक माह का हुआ आगाज बुधवार को रखा गया पहला रोजा मौलानाओं की अवाम से अपील कोरोना के बढ़ते कहर से बचने के लिए सरकार द्वारा बताए गए नियमो का पालन करें ज़्यादातर घरों मे ही रहकर इवादत करे और गरीबों की मदद करने को कहा गया । जामामस्जिद के इमाम कारी खलीकुर्रहमान ने बताया कि रमजान शरीफ के महीने अल्लाह बरकत ही बरकत देता है। तुम्हारे पास अजमत व बरकत वाला महीना आया है। वह महीना जिसमें एक रात ऐसी है जो हजार रातों से अफजल है और वो रात सबे कदर है। इस महीने के रोजे में अल्लाह तआला ने फैज किए और इसी रात में बीस रात रकात नमाज तराबीह सुन्नत है। जो इसमें नेकी का काम करे तो ऐसा है जैसे किसी और महीने में फैज अदा किए और इस महीने में जिसने फैज किया तो ऐसा है जैसे और दिनों मे सत्तर फैज अदा किए। यह महीना सब्र का है और सब्र का सबाब जन्नत और भलाई का है। यह वो महीना है जिसका पहला अशरा रहमत और दूसरा अशरा मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का है। उन्होंने कहा कि कआबा शरीफ अल्लाह तआला का प्यारा घर मुसलमानों को बुलाकर देता है। जैसे कुआ के पास जाएं तो पानी मिलता है और रमजान शरीफ अबरे रहमत है यानी रमजान खुद ही आकर बरसता है और सैराब कर देता है। रमजान शरीफ वह बरकत वाला महीना है । इमाम कारी फरीदुजजमा ने बताया कि रमजान के पाक माह का दिन हो या रात हर वक्त में इवादत होती है। रोजे इवादत इफ्तार तराबीह फिर नमाज तराबीह और शहरी खाना इवादत है। इसमें पिछले तमाम गुनाह माफ कर दिए जाते रोजे की फजीलत हजरत अबू हुरैरा रजि0 ने फरमाया मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो वाले वसल्लम से सुना अल्लाह फरमाता है कि हर अमल आदमी का उसके लिए है मगर रोजा के रोजादार को दो खुशियां है एक खुशी इफ्तार के वक्त दूसरी खुशी मुलाकातें परवरदिगार नमाज के वक्त । अलबत्ता रोजेदार के मुंह की बदबू अल्लाह के नजदीक मुस्क से भी ज्यादा बेहतर है । रोजेदार को रोजा रखकर क्या ना करना चाहिये 1_बुरी बात ना करें 2 , गाली ना बके 3, जिहालत ना करें 4, लड़ाई झगड़ा ना करें 5, अगर कोई लड़े तो उससे कह दे कि मैं रोजादार हूं मौलाना सलीम अख्तर ने आवाम से अपील की है तमाम मुस्लिम भाइयों से गुजारिश है फराइज की पाबंदी तरावी दीगर इबादत रोजा सब घर पर ही करें इफतार भी घर पर करें कहीं दावतों में ना जाएं कोरोना जैसी वबा को खत्म करने के लिए अल्लाह से ही दुआ करना है सबके साथ परहेज भी करना है । सभी मौलानाओं ने अवाम से अपील की कि सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करें ज़्यादातर इवादत अपने घरों मे ही करें ।

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