इसरो के युवा वैज्ञानिक ऐश्वर्या शंखधार को मिला गोल्ड मैडल और युवा वैज्ञानिक पुरस्कार
बदायूँ। शहर के मूल निवासी ऐश्वर्या शंखधार इसरो में साइंटिस्ट इंजीनियर है। उनकी चन्द्रयान-2 औऱ चन्द्रयान-3 मिशन में अहम भूमिका रही। वह जल्द लांच होने वाले गगनयान मिशन की टीम में भी शामिल है।इंडियन सोसायटी आफ सिस्टम फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग(isse) ने गोल्ड मैडल औऱ युवा वैज्ञानिक अवार्ड के लिए जटिल प्रक्रिया के बाद इसरो के दो युवा वैज्ञानिकों का चयन किया।

इसमे बदायूँ निवासी धीरज शंखधार के पुत्र युवा वैज्ञानिक ऐश्वर्या शंखधार शामिल थे। इंडियन सोसायटी आफ सिस्टम फॉर साइंस एंड इंजीनियरिंग(isse) के पिछले दिनों तिरुवनंतपुरम के महेंद्रगिरि में हुए युवा वैज्ञानिक अवार्ड समारोह में इसरो के युवा वैज्ञानिक ऐश्वर्या शंखधार को उनकी इस उपलब्धि के लिए गोल्ड मैडल और युवा वैज्ञानिक अवार्ड से सम्मानित किया। समारोह में इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ ने अपने हाथों से गोल्ड मैडल और यह अवार्ड दिया। यह बदायूँ औऱ देश-प्रदेश के लिये गौरव की बात है। उन्हें वर्ष 2018 में इसरो ने उत्कृष्टता अवार्ड से सम्मानित किया था। इसरो के युवा वैज्ञानिक ऐश्वर्या शंखधार की प्रारंभिक शिक्षा शहर में ही हुई है। वह शहर के जवाहरपूरी के निवासी है। उनके पिता धीरज शंखधार उप निबन्धक कार्यालय में प्रलेखक है। ऐश्वर्या शंखधार दो भाई है। उनके छोटे भाई अभिषक शंखधार साफ्टवेयर इंजीनियर है।

धीरज शंखधार बताते है कि उनके बेटे ऐश्वर्या शंखधार ने मदर एथीना स्कूल से इंटर किया है। शुरू से मेधावी छात्र रहे। उन्होंने बीटेक मेकेनिकल इंजीनियरिंग से किया। वह वर्ष 2015 से केरल में इसरो में साइंटिस्ट इंजीनियर के पद पर तैनात है। वह इसरो में अंतरिक्ष यान इंजन डिजाइन और इंजीनियरिंग में कार्य कर रहे है। चन्द्रयान-2 और चन्द्रयान-3 अंतरिक्ष यान की कक्षा बढ़ाने के संचालन के लिए विशेष रूप से योगदान दिया। वह गगनयान मिशन के लिए आरसीएस थ्रस्टर्स डिजाइन टीम में शामिल हैं। उपग्रह तापमान भविष्यवाणी मॉडल विकसित किया और 100N थ्रस्ट ग्रीन प्रोपेलेंट इंजन डिजाइन किया।













































































