पांच साल के बाद नेताजी आज द्वार पर आये है
गली-गली में देखो कितने पोस्टर यहां चिपकाये है।।
बिल्सी। क्षेत्र के गांव परौली में बीती रात एक काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिसमें गोला
गोकर्णनाथ से लौटकर आये सभी साहित्यकारों का सम्मान किया गया। जिन्होंने बदायूं का नाम रोशन किया है। कार्यक्रम गांव
के छोटे मंदिर में आयोजित किया गया। जिसमें कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। अचिन मासूम ने मां शारदे की
वंदना को पढ़ा। इसके बाद साहित्यकार विष्णु असावा ने अपना काव्य पाठ करते हुए कहा-
कोरोना तो रक्तबीज सम सांसों से जिसका उपगम
घर में चीत्कार हो रहा खत्म हुई सारी सरगम
अचिन मासूम ने पढ़ा-
ज़मीं पर आसमां को भी झुकाना जानते हैं हम
लहू निज देश की खातिर बहाना जानते हैं हम
सुनील शर्मा ने कहा-
जिनकी दम से आज भी हो रहा रोशन वतन है
जिनकी दम से मुस्काता महकता अमन चमन है
ओजस्वी कवि षटवदन शंखधार ने चुनाव को लेकर एक गीत सुनाते हुए कहा-
पांच साल के बाद नेताजी आज द्वार पर आये है।
गली-गली में देखो कितने पोस्टर यहां चिपकाये है।।
शैलेन्द्र मिश्रा ने कहा-
दिल में एक हसरत पाले हैं
खुद को मुश्किल में डाले हैं
अशोक कुमार दुबे ने कहा-
मां तुम्हारा ही विश्वास है मुझे
तू ही मेरी नाव पार लगायेगी
हर्ष मिश्रा ने कहा-
रखती है मां सबकी हर पल खबर
मां के रहते ना आती है विपदा नजर
प्रेम दक्ष बिल्सी ने कहा-
आंख में काजल होंठ पर लाली उम्र है तेरी वारी
जिगर का इंजन धक धक बोले तीर चले ना खाली
कार्यक्रम संयोजक आकाश पाठक ने सभी साहित्यकारों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया और कहा कि आप सब ऐसे ही बदायूं
का नाम रोशन करते रहो साथ ही डीजीसी सुधीर मिश्रा को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सुभाष पाठक, सुधीर गोले,
रत्नेश, उर्मिलेश, शीशबिनदु, जितेंद्र कुमार, गौरव शर्मा, विपिन होती, सुबोध पाठक, शालू उपाध्याय, अमित तिवारी, आशीष,
मुनीश, अमित पाठक आदि मौजूद रहे। अंत में रामरक्षपाल मिश्रा ने सभी साहित्यकारो का आभार व्यक्त किया।













































































