महिलाओं से जुड़ी गंभीर समस्या है पीसीओएस

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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) एक ऐसा विकार है, जो बड़ी संख्या में महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करता है। पीसीओएस आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों की वजह से हो सकता है और इसका महिलाओं के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है, जिसमें बांझपन की संभावना भी शामिल है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि हर 10 में से 3 से 4 महिलाओं को पीसीओएस का अनुभव हो सकता है। ऐसे में इस गंभीर समस्या के बारे में जागरूकता फैलाने के मकसद से हर साल सितंबर में पीसीओएस जागरूकता माह मनाया जाता है। इस महीने को मनाने का उद्देश्य इस समस्या के बारे में जागरूकता फैलाने के साथ ही इसके निवारक उपायों का पता लगाना भी है। पीसीओएस 18 से 44 वर्ष की आयु की लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करता है और बांझपन के प्रमुख कारणों में से एक है। ऐसे में पीसीओएस जागरूकता माह के मौके पर आज हम आपको बताएंगे कुछ ऐसी आदतों के बारे में, जिसकी मदद से आप इस समस्या के विकास के जोखिम को कम कर सकते हैं। बढ़ा हुआ वजन पीसीओएस के लिए प्राइमरी ट्रिगर है। इसलिए, अपने वजन को नियंत्रित रखने के लिए किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि फायदेमंद है। आप चाहे तो वॉकिंग, रनिंग या कोई भी होम वर्कआउट कर सकती हैं। रोजाना व्यायाम, विशेष रूप से वह व्यायाम जो पेट की चर्बी को कम करने के लिए पेट के निचले हिस्से को प्रभावित करते हैं, पीसीओएस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। आपका आहार पीसीओएस विकसित होने के जोखिम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में इससे दूर रहने के लिए पौष्टिक और संतुलित आहार अपनाएं। मीठे और तले हुए फूड आइटम्स से दूरी बना लें, हाई कैलोरी और जंक फूड से परहेज करें और डेयरी प्रोडक्ट का सेवन कम करें। फाइबर युक्त फूड आइटम्स को डाइट में शामिल करें। इन दिनों बदलती लाइफस्टाइल की वजह से तनाव जीवन का एक हिस्सा बन गया है। तनाव पीसीओएस के विकास में योगदान दे सकता है। ऐसे में इस समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि आप तनाव कम करने को प्राथमिकता दें। तनाव मैनेज करने के लिए आप योग, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार और मेडिटेशन आदि की मदद ले सकते हैं। इसके अलावा आप बाहर समय बिताकर, ताजी हवा में सांस लेकर और परिवार और दोस्तों के साथ अपने रिश्तों को बेहतर बनाकर भी तनाव को मैनेज कर सकते हैं। कुछ जड़ी-बूटियां भी पीसीओएस को रोकने में सहायता कर सकती हैं। मेथी या मेथी के पत्तों को अपनी रूटीन में शामिल करें और तुलसी के पत्तों को नियमित रूप से चबाएं। ये जड़ी-बूटियां इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं, जो महत्वपूर्ण है क्योंकि पीसीओएस के मरीजों में अक्सर इंसुलिन का स्तर बढ़ा हुआ होता है। इसके अलावा शहद, नींबू और पानी के मिश्रण को भी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं, क्योंकि ये प्राकृतिक पेय पीसीओएस को रोक सकते हैं।

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