जिस लॉर्ड माउंटबेटन ने नेहरू को दिया था सेंगल

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लंदन। भारत में नई संसद की बिल्डिंग बनकर तैयार है और पीएम नरेंद्र मोदी रविवार को इसका उद्घाटन करेंगे। इसको लेकर विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। नई संसद के उद्घाटन के दौरान दक्षिण भारत के चोल वंश के प्रतापी राजा का राजदंड ‘सेंगोल’ भी लोकसभा अध्‍यक्ष की कुर्सी के पास लगाया जाएगा। बताया जा रहा है कि यह वही सेंगोल है जिसे भारत में सत्‍ता हस्‍तातंरण के प्रतीक के रूप में अंग्रेज वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने पुजारियों के माध्‍यम से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को दिया था। कांग्रेस ने इसकी सत्‍यता को लेकर सवाल उठाया है। इस पूरे मामले में ब्रिटेन के आख‍िरी गवर्नन लॉर्ड माउंटबेटन का नाम बार-बार आ रहा है। यही वही माउंटबेटन हैं जिनकी ब्रिटेन में खौफनाक तरीके से हत्‍या कर दी गई थी। आइए जानते हैं पूरी कहानी…

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साल 1980 के दशक में आ‍यरिश रिपब्लिकन आर्मी उत्‍तरी आयरलैंड में ब्रिटेन के शासन का जोरदार तरीके से विरोध कर रही थी। आईआरए का यह विरोध खूनी हिंसा में बदल गया। साल 1979 में 27 अगस्‍त के दिन आईआरए के हमलावरों ने भारत में अंग्रेजों के आखिरी गवर्नर लॉर्ड माउंटबेटन की हत्‍या कर दी। लॉर्ड माउंटबेटन ब्रिटेन के राजकुमार फिलिप के चाचा थे और आईआरए ने उन्‍हें मारकर शाही परिवार को सीधा अपने निशाने पर ले लिया। यही नहीं इसी दौरान आईआरए के लड़ाकुओं ने ब्रिटेन की सेना पर भीषण हमला बोला था।

दूसरे विश्‍वयुद्ध के हीरो रहे लॉर्ड माउंटबेटन हमले के समय एक मछली पकड़ने वाली नौका पर सवार थे। माउंटबेटन उत्‍तरी पश्चिमी आयरलैंड में अपने घर के पास 6 अन्‍य लोगों के साथ नाव पर मौजूद थे। कई दिनों की बारिश के बाद अच्‍छा मौसम हुआ था और माउंटबेटन घूमने के लिए निकले थे। उनकी नौका को अभी सफर शुरू किए 15 मिनट ही हुए थे, उसमें रखे बम में विस्‍फोट हो गया। इस बम में धमाका आईआरए के दो सदस्‍यों ने किया था। ये उत्‍तरी आयरलैंड को अलग देश बनाना चाहते थे।

ब्रिटेन की सरकार और आईआरए के बीच साल 1998 में बेलफास्‍ट समझौता हुआ और इस हिंसा का अंत हो गया जिसमें 3600 लोगों की जान गई थी। बम हमले के एक प्रत्‍यक्षदर्शी ने न्‍यूयार्क टाइम्‍स को बताया था, ‘लॉर्ड माउंटबेटन की नाव वहां कुछ ही समय पहले पहुंची थी और अगले मिनट वह कुछ ऐसे हो गई जैसे माचिस की तीलियां पानी पर तैरती हैं। इस हमले के दौरान नाव पर माउंटबेटन, उनकी बेटी पैट्रिशिया, उनके पति लॉर्ड जॉन ब्राबोर्न, उनके दो जुड़वां बच्‍चे भी मौजूद थे। बम हमले के बाद माउंटबेटन, निकोलस ब्राबोर्न और मैक्‍सवेल की तत्‍काल मौत हो गई। लेडी ब्राबोर्न की अगले दिन मौत हो गई और बाकी लोग गंभीर हालत के बाद बच गए।

माउंटबेटन पर किताब लिखने वाले एंड्रीव लोवनी के मुताबिक इस नाव को उड़ाने के लिए 50 पाउंड जिलेटिन का इस्‍तेमाल किया गया था। यह विस्‍फोट इतना ताकतवर था कि पूरी नाव तबाह हो गई। इसी दिन बाद में आयरलैंड की सीमा पर एक और खूनी हमला हुआ जिसमें 18 ब्रिटिश सैनिकों की मौत हो गई। माउंटबेटन की हत्‍या ब्रिटेन के लिए भावुक करने वाला प्रतीकात्‍मक लक्ष्‍य था। वह ब्रिटेन के शाही परिवार के सबसे सम्‍मानित सदस्‍यों में से एक थे। लॉर्ड माउंटबेटन उस समय ब्रिटेन के राजकुमार रहे फिल‍िप के मेंटर भी थे। माउंटबेटन को अपनी हत्‍या का भरोसा नहीं था और इसलिए उन्‍होंने सुरक्षा को ठुकरा दिया था।

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