मुलायम सिंह की समधन अनुशासनहीनता और काम में लापरवाही के चलते जोनल अधिकारी के पद से सस्पेंड

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लखनऊ। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की समधन अम्बी बिष्ट को अनुशासनहीनता और काम में लापरवाही के चलते देर शाम निलंबन का नोटिस भेजा गया. इतना ही नहीं, नगर आयुक्त ने उनकी जगह जोन 6 के लिए नए जोनल अधिकारी को भी तैनात कर दिया.

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अंबी बिष्ट ने भी लगाए संगीन आरोप
मामला हाईप्रोफाइल था, इसलिए सरकार के कुछ नेताओं ने अम्बी बिष्ट की पैरवी भी की. हालांकि, नगर आयुक्त ने किसी की नहीं सुनी. इसके उलट, अब मामले में एक नया मोड़ आ गया है. अम्बी बिष्ट ने नगर आयुक्त पर ही महिला अफसर से अभद्रता करने का आरोप लगा दिया है और कहा है कि बेवजह ही यह कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने यह तक कहा है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण से लेकर नगर निगम ने उनके ऊपर केवल इसलिए निशाना साधा हुआ है, क्योंकि वह राज्य के बड़े राजनैतिक परिवार से संबंध रखती हैं.

सही जवाब न मिलने पर नगरायुक्त ने मीटिंग से जाने के बोला
गौरतलब है कि बीते बुधवार को गृहकर वसूली, सफाई सहित कई कार्यों को लेकर नगर निगम मुख्यालय में एक बैठक की गई. इस मीटिंग में नगर आयुक्त  ने अम्बी बिष्ट से काम को लेकर जानकारी मांगी. उन्होंने सही से कोई जलवाब नहीं दिया. इसपर नगर आयुक्त ने बिष्ट को मीटिंग छोड़कर जाने को बोल दिया. इस बात पर विवाद हो गया. नगरायुक्त ने अम्बी बिष्ट की जगह पर उप नगर आयुक्त प्रज्ञा सिंह को तैनात भी कर दिया.

अम्बी ने बताया ‘पुरानी खुन्नस’ का मामला
वहीं, अम्बी बिष्ट ने बताया है कि उनपर लगे लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप गलत हैं. उन्होंने नगर आयुक्त से ही पूछा है कि ऐसी कौन सी लापरवाही उन्होंने देख ली? बिष्ट कहती हैं कि वह सुबह से लेकर रात तक काम करती हैं. अब गोमती नगर और पुराने लखनऊ की बराबरी करना तो सही नहीं है. बिष्ट ने यह भी कहा कि नगर आयुक्त को उनसे पुरानी खुन्नस है, जिसका वह बदला ले रहे हैं. साथ ही अंबी बिष्ट ने आरोप लगाते हुए कहा है कि भरी मीटिंग में नगरायुक्त ने एक महिला के साथ अभद्रता की है. उन्होंने बार-बार एक ही बात कही कि ‘मैडम आप मीटिंग से जाइए.’ यह बिष्ट को अपमानजनक लगा. उन्होंने यह भी कहा कि नगर आयुक्त के पास निलंबित करने का कोई अधिकार नहीं होता. वह सिर्फ और सिर्फ शासन के रिपोर्ट भेज सकते हैं.

दो साल पहले कह दिया था ‘महारानी’
बता दें, 2 साल पहले भी कुछ ऐसे ही मुद्दे पर एक विवाद खड़ा हो गया था. नगर निगम कार्यकारिणी बैठक के दौरान भाजपा के एक पार्षद ने उन्हें माहारानी कह कर बुला दिया था, जिस पर बिष्ट नाराज हो गई थीं और फिर खूब बहस हुई. बात इतनी बढ़ गई थी कि समर्थक धरना प्रदर्शन पर उतर आए थे. लेकिन फिर महापौर और बाकी अफसरों ने मिलकर बीच-बचाव किया और मामले को शांत कराया गया. 

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