अमेरिका में एक प्रयोग में बूढ़े चूहों को फिर से जवान बना दिया, इंसानों की जगी उम्मीद, बूढ़े भी हो सकते हैं जवान!

111111111
WhatsAppImage2024-05-04at205835
previous arrow
next arrow

नई दिल्ली. अमेरिका के बोस्टन में चूहों पर किए गए एक प्रयोग में बूढ़े चूहों को फिर से जवान बना दिया गया. अंधे चूहों की आंखों की रोशनी लौट आई. बूढ़े चूहों में होशियार, युवा दिमाग विकसित हो गया और स्वस्थ मांसपेशियों और गुर्दे के ऊतकों का निर्माण हो गया. अब कयास लगा रहे हैं कि क्या इंसान की बढ़ती उम्र को भी रोका जा सकता है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में जेनेटिक्स के प्रोफेसर और पॉल एफ ग्लेन सेंटर के को-डायरेक्टर (सह निदेशक) डेविड सिंक्लेयर ने कहा कि इन प्रयोगों से पता चलता है कि वृद्धावस्था एक प्रतिवर्ती प्रक्रिया है जो इच्छानुसार आगे और पीछे संचालित होने में सक्षम है. जीव विज्ञानी सिंक्लेयर ने कहा कि हमारे शरीर में हमारे युवावस्था की बैकअप कॉपी होती है जिसे पुन: उत्पन्न करने के लिए ट्रिगर किया जा सकता है.

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at1242061
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2025-06-11at40003PM
previous arrow
next arrow

जर्नल सेल में गुरुवार को पहली बार प्रकाशित संयुक्त एक्सपेरीमेंट (प्रयोग) वैज्ञानिक विश्वास को चुनौती देते हैं कि उम्र बढ़ने को आनुवंशिक उत्परिवर्तन (जेनेटिक म्यूटेशन) का परिणाम बताया जाता है, जो हमारे डीएनए को कमजोर करता है, क्षतिग्रस्त सेलुलर ऊतक को खराब करता है, बीमारी और मृत्यु का कारण बन सकता है. लैब में काम कर रहे एक जेनेटिक्स रिसर्च फेलो जे-ह्यून यांग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अभी तक जिस तरह से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को देखते हैं और जिस तरह से हम उम्र बढ़ने से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए दृष्टिकोण बनाते हैं उसे हम बदल देंगे.

उम्र पर कंट्रोल
नेशनल ह्यूमन जीनोम रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक अगर हम डीएनए को शरीर के हार्डवेयर के रूप में देखें तो एपिजेनोम एक सॉफ्टवेयर है. एपिजेंस प्रोटीन और रसायन होते हैं जो प्रत्येक जीन पर झाई की तरह बैठते हैं. जो यह तय करते हैं कि जीन को क्या करना है, कहां करना है और कब करना है. डेविड सिंक्लेयर ने कहा कि एपिजेनोम वस्तुतः जीन को चालू और बंद करता है. उन्होंने कहा, “यह प्रक्रिया प्रदूषण, पर्यावरण के जहरीले पदार्थ और धूम्रपान के सेवन या नींद की कमी से शुरू होती है. कंप्यूटर की तरह सेलुलर प्रक्रिया दूषित हो जाती है क्योंकि DNA टूट जाता है या खराब हो जाता है. जिसके बाद यह दोबारा अपने मूल स्वरूप में नहीं आ पाता. दूसरे शब्दों में कहें तो सेलुलर टुकड़े अपने घर का रास्ता खो देते हैं, अल्जाइमर (भूलने की बीमारी) वाले व्यक्ति की तरह.”

प्रयोग को लेकर सिंक्लेयर ने कहा, “आश्चर्यजनक खोज यह है कि शरीर में सॉफ़्टवेयर की एक बैकअप प्रति है जिसे आप रीसेट कर सकते हैं. हम दिखा रहे हैं कि वह सॉफ्टवेयर क्यों खराब हो जाता है और कैसे हम रीसेट स्विच में टैप करके सिस्टम को रीबूट कर सकते हैं जो सेल की जीनोम को सही ढंग से पढ़ने की क्षमता को पुनर्स्थापित करता है, जैसे कि वह युवावस्था में करता था.” सिंक्लेयर ने कहा, “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि शरीर 50 साल का या 75 साल का है, स्वस्थ है या बीमारी से ग्रस्त है. एक बार उस प्रक्रिया को शुरू कर दिया गया तो फिर शरीर याद रखेगा कि कैसे पुन: उत्पन्न करना है और फिर से युवा हो जाएगा, भले ही आप पहले से ही बूढ़े हो और बीमारी हो. अब, वह सॉफ्टवेयर क्या है, हम अभी तक नहीं जानते हैं. इस बिंदु पर, हम बस इतना जानते हैं कि हम स्विच को फ्लिप कर सकते हैं.”

फिर से जवान हो सकते हैं
प्रयोग को लेकर आनुवंशिकविद युआनचेंग लू ने कहा कि प्रयोग के लिए हमने चार में से तीन “यामानाका कारकों” का मिश्रण बनाया. यह मानव वयस्क त्वचा कोशिकाएं हैं जिन्हें भ्रूण या प्लुरिपोटेंट स्टेम कोशिकाओं की तरह व्यवहार करने के लिए पुन: प्रोग्राम किया गया है, जो शरीर में किसी भी कोशिका में विकसित होने में सक्षम हैं. जिसके बाद कॉकटेल को नेत्रहीन चूहों की आंखों के पीछे क्षतिग्रस्त रेटिनल नाड़ीग्रन्थि कोशिकाओं में इंजेक्ट किया गया और चूहों को एंटीबायोटिक खिलाया गया. जिसके बाद हमने देखा कि चूहों ने अपनी अधिकांश दृष्टि वापस पा ली. अध्ययन के अनुसार, इसके बाद, टीम ने मस्तिष्क, मांसपेशियों और गुर्दे की कोशिकाओं पर भी काम किया और उन्हें बहुत आसानी से बहाल किया.

सिंक्लेयर ने कहा कि उनकी टीम ने चूहों में कोशिकाओं को कई बार रीसेट किया है, यह दर्शाता है कि उम्र बढ़ने को एक से अधिक बार रिवर्स किया जा सकता है, और वह वर्तमान में प्राइमेट्स में आनुवंशिक रीसेट का परीक्षण चल रहा है. चूहों पर हुए इस परीक्षण के बाद अब ये कयास लगाए जाने लगे हैं कि क्या इंसानों पर भी बुढ़ापे के असर को कम किया जा सकता है. हालांकि इंसानों को लेकर अभी तक ऐसा कोई भी प्रयोग नहीं हुआ है.

WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow
Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights