फसल के बचाव के लिए ऐसे करें निगरानी

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बदायूँ । जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने अवगत कराया है कि रवी की प्रमुख फसलों में गेहूँ, राई/ सरसों, एवं आलू में लगने वाले कीट/रोग से बचाव हेतु नियमित निगरानी करें। कीट/रोग के लक्षण परिलक्षित होने पर तत्काल सुझाव एवं संस्तुतियों को अपनाकर फसल को बचा सकते हैं। गेहूँ पीली गेरूई रोग के लक्षण सर्वप्रथम पत्तियों पर पीले रंग की धारी के रूप मे दिखाई देते हैं जिसे हाथ की उगलियों से छूने पर पीले रंग का पाउडर लग जाता है।
रोग के लक्षण दिखाई देने पर प्रोपिकोनाजोल 25 प्रतिशत ई०सी०. 200 मिली0 मात्रा को 250-300 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति एकड की दर से छिडकाव करना चाहिये। रोग के प्रकोप तथा फैलाव को देखते हुए दूसरा छिड़काव 10-15 के अन्तराल पर करें। फसल पर रसायन का छिड़काव वर्षा व कोहरे की स्थिति में न करें। तापमान में गिरावट होने पर राई / सरसों की फसल में माहू कीट के प्रकोप होने की सम्भावना बढ़ जाती है। यदि कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर (5 प्रतिषत प्रभावित पौधे) से अधिक हो तो निम्नलिखित रसायनों में से किसी एक को प्रति एकड़ की दर से लगभग 200-250 ली0पानी में घोल कर छिड़काव करें। एजाडिरेक्टिन 0.15 प्रतिशत ई०सी० -1.0 लीटर। डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ई०सी० – 0.4 लीटर। ऑक्सीडिमेटान मिथाइल-25 प्रतिशत- 0.4 लीटर। आलू की फसल में अगेती / पछेती झुलसा रोग का प्रकोप होने पर पत्तियों पर भूरे एवं काले रंग के धब्बे बनते है तथा तीव्र प्रकोप होने पर सम्पूर्ण पौधा झुलस जाता है। रोग के प्रकोप की स्थिति में निम्नलिखित रसायनों में से किसी एक को 250-300 ली० पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। कापरऑक्सी क्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यू0पी0-1.0 कि०ग्रा०। मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यू०पी०-0.8 कि०ग्रा०। जिनेब 75 प्रतिशत डब्ल्यू0पी0-0.8 कि०ग्रा०। जब वायुमंडल का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम तथा 0 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है तो पाला पड़ता है। इससे फसलों को बचाने के लिए सल्फर का 1 प्रतिशत का घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करना चाहिए। नर्सरी में पौधों को रात में प्लास्टिक की चादर से ढकना चाहिए। पाले से बचाव के लिए खेत के चारों ओर मेड़ों पर पेड़ झाड़ियों की बाड़ लगानी चाहिए। पपीता व आम के छोटे पेड़ को प्लास्टिक की क्लोच बनाकर पौधो को ढकने से पौधो को पाले से बचाया जा सकता है। खेत में पर्याप्त नमी बनायें रखना चाहिए। इससे भूमि का तापमान 02 से 03 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है।

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