टीईटी अनिवार्यता से राहत की मांग को लेकर शिक्षकों ने सौंपा ज्ञापन
बरेली। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर गुरुवार को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में प्रदर्शन एवं ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बरेली के कार्यकारी जिलाध्यक्ष एवं जिला महामंत्री सुनील बाल कुमार शर्मा के नेतृत्व में शिक्षकों ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया।
ज्ञापन में वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों तथा उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की तिथि 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से स्थायी रूप से मुक्त किए जाने की मांग की गई। शिक्षकों का कहना है कि 23 अगस्त 2010 को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा टीईटी को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया गया था, जबकि इससे पहले निर्धारित नियमों एवं पात्रता मानकों के अनुसार लाखों शिक्षकों की नियुक्तियां विधिवत की जा चुकी थीं।
जिला महामंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि संगठन सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय का सम्मान करता है, लेकिन शिक्षकों के सेवा हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार और संसद को आवश्यक विधायी एवं नीतिगत कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे लाखों शिक्षकों और उनके परिवारों में व्याप्त असमंजस एवं असुरक्षा की भावना समाप्त होगी।
जिला संगठन मंत्री सत्यार्थ पाराशरी ने मांग की कि 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों तथा उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी राहत दी जाए तथा उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य लाभों का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। वहीं जिला कोषाध्यक्ष परीक्षित गंगवार ने कहा कि दशकों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव और योगदान को देखते हुए उनके सेवा अधिकारों की रक्षा करना न्याय और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप होगा।
ज्ञापन कार्यक्रम में संगठन के जिला एवं ब्लॉक पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों ने भाग लेकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।















































































