जल, थल और नभ में भी चीन की नापाक चालों से भारत सतर्क !

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— एल ए सी पर दक्षिणी लद्दाख में भारतीय सीमा की रेजांगला, रेजिंला आदि चोकीओ के सामने चीनी टैंक हैं तैनात
— निर्भय सक्सेना —

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लेह लद्दाख, अरुणांचल में भारत की चीन से लगी सीमाओं पर आजकल पारा शून्य से भी नीचे जा चुका है पर चीन अपनी नापाक हरकतों को अंजाम देने से अभी भी नहीं चूक रहा है साथ ही अब एल ए सी पर दक्षिणी लद्दाख में 70 हजार फुट ऊँचाई पर भारतीय सीमा की रेजांगला, रेजिंला, मुखोरखी की चोकीओ के सामने चीन ने अपने टैंक भी तैनात किए हैं जिसकी सूचना टीवी चेनल पर भी जारी हुई हैं। अब भारत जल, थल और नभ मे भी चीन की कुटिल चाल पर पैनी नजर रख रहा है । इसी को ध्यान में रख कर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सी डीएस) जनरल विपिन रावत ने चीन की सीमाओं पर जाकर भारतीय सैनिकों की हौसला बढ़ाया और चीन को सीधी चेतावनी दी कि भारत पर कुदृष्टि डालने बाला अब बरबाद हो जाएगा। केन्द्र सरकार ने भी समुन्द्री सीमाओं पर निगरानी के लिए ड्रोन खरीदने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। नए वर्ष में अब भारत भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य बन गया है और भारत का अब कार्यकाल भी प्रारम्भ हो गया है। पूरे विश्व को कोरोना की महामारी देने वाले चीन पर सभी देशों ने अपना गुस्सा भी जताया और अमरीका ने तो विश्व स्वास्थ्य संगठन को अपनी आर्थिक मदद तक रोक दी। इसके बाद भी चीन अपनी कुटिल चालबाजी से अपने पड़ोसी देशों को परेशान करने से अभी भी बाज नही आ रहा है। गलवां में भारत से मुंह की खाने के बाद वह नेपाल में भी अपनी नापाक चाल चल रहा था। जहाँ भी भारत ने उसे नाकाम कर दिया। नेपाल में सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और असंतुष्ट पुष्प कमल दहल प्रचंड को भी मनाने में ड्रेगन एवम नेपाल में चीन की राजदूत हाउ यांकी बुरी तरह बिफल ही रहीं। अब तो प्रधानमंत्री ओली ने भी चीन से अपना पल्ला झाड़ लिया। भारत भी चाहता था कि पड़ोसी देश नेपाल में नए चुनाव होने ही चाहिए। पर अब प्रधानमंत्री ओली विरोध करने वाले नेपाली काँग्रेस के अदयक्ष शेर बहादुर देउबा के साथ के भी सरकार बनाने को उत्सुक है जिस पर अब भी भारत की पैनी नजर है और भारत भी नेपाल के साथ रोटी बेटी बाले रिश्ते को कायम रख रहा है। नए साल 2021 में जनरल विपिन रावत ने अपने पद का एक वर्ष का कार्यकाल पूरा किया। साथ ही उन्होंने अरुणांचल, असम एवम पूर्वी शेत्र के वायु सैनिक ठिकानों का हवाई दौरा किया। चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एल ए सी) के भारतीय ठिकाने पर सैनिको का मनोबल बढ़ाया। 2 दिन के दौरे पर विपिन रावत ने सैनिको से बात कर नए आधुनिक उपकरणों की तैयारियों का भी जायजा लिया। दिवांग घाटी एवम लोहित सेक्टर में भी जवानों से चीन का फीड बैक लिया। इस भयंकर सर्दी में जवानों के साहस की प्रशंसा भी की। अमरीका के रक्षा मामलों के विश्लेषक एच आई साटन ने अमेरिका की पत्रिका फोर्ब्स में लिखी रिपोर्ट में कहा कि चीन ने हिन्द महासागर में सी विंग (हैवी) ग्लाइडरस नामक अंडरवाटर ड्रोन का एक बेड़ा तैनात भी किया था जो महीनो तक समुद्र में जल के अंदर नोसेना की निगरानी करने में सक्षम भी है। जिसमे अब चीन और बेड़े बढ़ा रहा है। अब इसी को ध्यान में रखकर भारत ने भी हिन्द महासागर में नोसेना के पोत से जुड़े 10 शिपबांर्न ड्रोन खरीदने को भी 1300 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसके अलावा अमरीका से गार्डियन ड्रोन की भी अलग से खरीद हो सकती है। यही नही पूर्वी लद्दाख में चीन से गतिरोध के चलते पेगांग झील एवम अन्य जल स्रोतों में भी निगरानी को 12 उच्च छमता की गश्ती नोकाओं (पेट्रोलिंग वोट) भी गोवा शिपयार्ड से लाई जाएंगी। भारत को ही नही चीन अपने अन्य पड़ोसी देशों को भी परेशान कर रहा है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग्वें ने कहा कि उनका देश चीन के सैन्य आतंक को झेल रहा है। इससे ताइवान के आसपास भी खतरा मंडरा रहा है जो दुनियां के लिए भी चिंता की बात है। जबकि उल्टा चीन ने अमरीका पर आरोप लगाया है कि ताइवान जलडमरू में अमरीका के 2 पोतों ने शक्ति का प्रदर्शन किया है। स्मरण रहे पूर्व में अमरीका चीन आर्थिक व सुरक्षा समीक्षा आयोग (यू ए सी सी ) ने अपनी 2020 की रिपोर्ट में कहा था कि ऐसा संकेत भी हैं कि जिनपिंग सरकार ने ही गलवां के खूनी संघर्ष की पटकथा लिखी और चीन के विदेश मंत्री ने हिंसा भड़काने के बयान भी दिए। उपग्रह के फ़ोटो भी वहां चीनी सैन्य ठिकाने एवम टैंक होने की पुष्टि करते है। चीन चालबाजी से भारत और जापान की सीमाओ पर अपना झूठा बर्चस्व कायम की चाल में लगा था। अमरीका के राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जान रेट क्लिफ ने भी कहा था कि चीन देश एवम दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा है । हाल यह है कि अब चीन ने अपना रक्षा कानून को भी 26 दिसंबर 2020 को संशोधित कर सैन्य निर्णय का अधिकार राज्य परिषद (चीनी केबिनेट ) से लेकर सैन्य आयोग के मुखिया को दिया है। जिसका कार्य भी अब राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ही हाथ मे होगा। अब हाल यह है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा ( एल ए सी) पर चीन के 50 हजार सैनिक 13 हजार फुट की उंचाई पर तैनात तो हैं पर शून्य से नीचे वाली ठंड से बेहाल हैं। जिस कारण रोज ही अग्रिम मोरचे पर चीन अपने सैनिक बदलने को मजबूर भी हो गया है। भारतीय सैनिको के लिए सरकार ने ठंड से वचाब के लिए हर सहायता उपलब्ध करा दी है। 5 मई 2020 के विवाद के बाद भारत चीन के बीच कमांडर स्तर की कई वार्ता भी हुईं । चीन ने वार्ता में बनी सहमति के बाद भी अपने सैनिकों को आज तक पीछे नही हटाया है। साथ ही अब एल ए सी पर दक्षिणी लद्दाख में 70 हजार फुट ऊँचाई पर भारतीय सीमा की रेजांगला, रेजिंला, मुखोरखी की चोकीओ के सामने चीन ने अपने टैंक भी तैनात किए हैं जिसकी सूचना टीवी चेनल पर भी जारी हुई हैं।
अब अब नेपाल में भी चीन गड़बड़ कर रहा है। भारत सरकार चीन की हर चाल पर नजर रख कर हर मोरचे पर सेना को मजबूत कर रही है। भारत मे ब्रह्मोस मिसायल के कई परीक्षण भी सफल रहे है। चीन को अब समझ आ गया है कि अब यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला मजबूत भारत है। भारत ने नए साल 2021 में कोविड की वेक्सीन लगाने का भी अब सफलता से ‘ड्राई रन’ भी पूरा कर लिया। भारत मे सीरम इंस्टीट्यूट की ‘कोविडशील्ड’ और भारत बायोटेक की ‘कोवेक्सिन’ नामक देसी टीके को भी केंद्रीय ओषधि मानक नियंत्रण संगठन की विशेषग समिति की सिफारिश के बाद भारतीय ओषधि महानियंत्रक डॉ वी जी सोमानी ने भी रविवार को आपातकाल में प्रयोग को मंजूरी दे दी है। चीन के बुहान से कोरोना वायरस से फैली कोविड 19 की जंग से निपटने में यह भारत की एक बड़ी उपलब्धि भी है। निर्भय सक्सेना, पत्रकार बरेली

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