बदायूँ में दरोगा फांसी मामला निर्णायक मोड़ पर,इंस्पेक्टर पर कानूनी शिकंजा कस सकता?

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बदायूं। न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात उपनिरीक्षक (दरोगा) मेघ श्याम गौतम की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। इसमे मौत की वजह हैंगिंग दम घुटने से मौत आई है।
इधर शाम को एसएसपी अंकिता शर्मा का इस घटना पर दूसरा अधिकृत बयान सामने आया है। इसमे उंन्होने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का उल्लेख किया है। साथ ही कहा है कि परिजनों ने जो भी आरोप लगाए है,उस सम्बंध में तहरीर मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना पर एसएसपी का नया बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरोगा मेघ श्याम गौतम के परिजनों ने उनके प्रभारी इंस्पेक्टर शाहिद अली पर धार्मिक आस्था को बार बार चोट पहुँचने,मजाक बनाने, भगवान श्री राम व श्री कृष्ण को मानने पर आपत्ति जताने, उत्पीड़न करने तरह तरह से परेशान करने के आरोप लगाए थे। परिजनों ने इंस्पेक्टर को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने आत्महत्या मानना से साफ इंकार करते हुए हत्या बताया है। हालांकि पुलिस शुरू से ही सभी एंगल पर गहन जांच कर रही है।दरोगा के पुत्र बृजनंदन गौतम और परिवार के अन्य सदस्यों ने उन्हें समझाकर एक दिन पहले ही बदायूं वापस भेजा था। परिजनों का कहना है कि जिस व्यक्ति को घरवालों ने समझाकर ड्यूटी पर भेजा, उसका एक दिन बाद फंदे पर लटका शव मिलना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।दरोगा मेघ श्याम गौतम मूल रूप से मथुरा जनपद के गोविंद नगर थाना क्षेत्र के ग्राम सकना निवासी थे। मेघ श्याम गौतम बदायूं न्यायालय की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात थे। वह सिविल लाइन थाना क्षेत्र की मधुबन कॉलोनी में विकेश राठौर के मकान में किराए पर रहते थे।
दरोगा का शव खिड़की में अंगोछे के सहारे फंदे से लटका मिला।हालांकि अभी तक किसी सुसाइड नोट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब मथुरा से पहुंचे परिजनों ने पोस्टमार्टम हाउस पर हत्या का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर सीओ सिटी रजनीश उपाध्याय और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची तथा परिजनों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया।दरोगा मेघ श्याम गौतम की मौत ने पुलिस महकमे में सनसनी फैला दी है। परिजनों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद मामला केवल आत्महत्या तक सीमित नहीं रह गया है। अब सबकी नजर फॉरेंसिक जांच और पुलिस की विवेचना पर टिकी है। यदि परिजनों के आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो यह मामला पुलिस विभाग के भीतर कार्यस्थल पर उत्पीड़न और धार्मिक भेदभाव जैसे गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है

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