जब भेदभाव हार गया और ममता जीत गई
बदायूं। स्वास्थ्य विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्रों को दिया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत कम वजन में जन्मी बच्ची सरस्वती की कहानी प्रेरणादायक है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 विकास शर्मा ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 20 अक्टूबर 2025 को ग्राम कुऑडंडा में जन्मी नन्ही सरस्वती का जीवन जन्म के साथ ही अनेक चुनौतियों से घिर गया। जन्म के समय उसका वजन मात्र 2.1 किलोग्राम था, जो सामान्य से काफी कम था। इसके अतिरिक्त परिवार में लगातार चार बेटियों के बाद पुत्र की अपेक्षा होने के कारण उसके जन्म को उत्साहपूर्वक स्वीकार नहीं किया गया। परिवार की सामाजिक एवं मानसिक परिस्थितियों का प्रभाव बच्ची की देखभाल पर भी पड़ा। उसे जन्म के बाद पर्याप्त स्तनपान नहीं मिल पाया तथा बाजार का दूध दिया जाने लगा, जिससे उसका स्वास्थ्य लगातार कमजोर होता गया।
उन्होंने बताया कि नियमित गृह भ्रमण के दौरान आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने पाया कि बच्ची का वजन अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ रहा है तथा उसका स्वास्थ्य तेजी से गर रहा है। स्थिति गंभीर होने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा तत्काल हस्तक्षेप किया गया। उन्होंने बताया कि आशा कार्यकर्ता द्वारा नियमित गृह भ्रमण किया गया। माता एवं परिवार की लगातार काउंसिलिंग की गई। स्तनपान के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। कंगारू मदर केयर की जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया गया। नियमित टीकाकरण एवं पोषण संबंधी परामर्श प्रदान किया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए बच्ची को अस्पताल रेफर किया गया। विशेष नवजात देखभाल इकाई में भर्ती कर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य टीम की निरंतर निगरानी, चिकित्सकीय देखभाल एवं परिवार के सहयोग से सरस्वती के स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। उसका वजन बढ़ने लगा था शारीरिक विकास सामान्य दिशा में आगे बढ़ा। आज सरस्वती एक स्वस्थ एवं सक्रिय बच्ची है और उसका परिवार भी उसके प्रति सकारात्मक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण अपना चुका है।
उन्होंने बताया कि इस प्रयास से न केवल एक कम जन्म वजन वाली बच्ची का जीवन सुरक्षित हुआ, बल्कि परिवार में बेटी के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई। यह उदाहरण दर्शाता है कि समय पर पहचान, उचित उपचार एवं प्रभावी सामुदायिक परामर्श से गंभीर परिस्थितियों को भी सफलता में बदला जा सकता है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक नवजात शिशु समान देखभाल एवं अवसर का अधिकार रखता है।कम जन्म वजन वाले शिशुओं की समय पर पहचान एवं उपचएर अत्यंत आवश्यक है। आशा, आंगनवाड़ी एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त कार्यवाही जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।परिवार की सकारात्मक सहभागिता स्वस्थ बाल विकास की आधारशिला है। सही समय पर सही सलाह, समर्पित स्वास्थ्य सेवाएँ और परिवार का सहयोग- यही नन्हीं सरस्वती के स्वस्थ जीवन की सफता की कुंजी बनी।















































































