नवनियुक्त कुलपति प्रो. पुष्पेंद्र सिंह बोले – शोध, नवाचार, रोजगारपरक शिक्षा और छात्र हित होंगे सर्वोच्च प्राथमिकता
शाहजहांपुर। स्वामी शुकदेवानंद विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रोफेसर पुष्पेंद्र बहादुर सिंह ने विश्वविद्यालय के विकास और भविष्य की योजनाओं को लेकर बड़ा विजन प्रस्तुत किया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को व्यवस्थित और गतिशील स्वरूप देने के लिए अनेक संरचनात्मक बदलाव किए जाएंगे, जिससे संस्थान शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सके।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की गति बढ़ाने के लिए प्रवेश, परीक्षा, शिक्षण और परिणाम जैसी सभी प्रक्रियाओं को नियमित और तेज बनाया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार नए पदों का सृजन कर योग्य शिक्षकों की भर्ती की जाएगी ताकि शिक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।कुलपति प्रो. सिंह ने विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए कहा कि आसपास के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया जाएगा और उन्हें करियर संबंधी उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी तैयारियां युद्ध स्तर पर पूरी की जाएंगी ताकि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान बना सके।उन्होंने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को अपने ही शहर के विश्वविद्यालय में प्रवेश का अवसर मिलेगा। इसके लिए समर्थ पोर्टल, शैक्षणिक कैलेंडर, वेबसाइट और अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाओं को शीघ्र पूरा किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि छात्र हित उनके लिए सर्वोपरि है और इसके लिए सभी को प्रतिबद्ध होकर कार्य करना होगा।प्रो. सिंह ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय आसपास के कुछ गांवों को गोद लेकर वहां के बच्चों के व्यक्तित्व विकास और सामाजिक जागरूकता के लिए कार्य करेगा।प्रेस वार्ता से पूर्व वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. अनुराग अग्रवाल ने कुलपति का विस्तृत परिचय दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिशिर शुक्ला ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जयशंकर ओझा ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव वीरेंद्र कुमार मौर्य, वित्त अधिकारी दीपक कुमार रस्तोगी, पूर्व प्राचार्य डॉ. अवनीश मिश्र सहित बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहे।
ये रहेंगी प्राथमिकताएंनवीन कुलपति ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय को गति प्रदान करना उनकी पहली जिम्मेदारी होगी। प्राथमिक गतिविधियों में प्रवेश प्रक्रिया को नियमित करना, निर्बाध शिक्षण सुनिश्चित करना, रोजगारपरक एवं नवीन पाठ्यक्रम शुरू करना, ई-लर्निंग को बढ़ावा देना, विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ एमओयू करना तथा विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक रैंकिंग में उच्च स्थान दिलाना शामिल रहेगा।















































































