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मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने की उठी मांग, गुरुकुल शिक्षा के लिए सनातन यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव

May 19, 2026By admin0 comments
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बदायूँ। सनातन बोर्ड की कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण चिंतन बैठक संगठन अध्यक्ष जितेंद्र कुमार साहू के पटियाली सराय स्थित आवास पर आयोजित की गई। बैठक में मंदिरों के प्रबंधन, सनातन धर्म के उत्थान और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर गंभीर मंथन हुआ। देर रात तक चली चर्चा के बाद विभिन्न प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए।बैठक में मठ-मंदिर विभाग प्रमुख एडवोकेट अश्वनी भारद्वाज और पंडित मनोज कुमार मिश्रा द्वारा कई प्रमुख प्रस्ताव रखे गए। इनमें मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने, हिंदू समाज द्वारा मंदिरों में दिए जाने वाले दान का उपयोग केवल सनातन धर्म के उत्थान के लिए करने तथा मंदिरों के पुजारी और महंतों को पूर्णकालिक राजकीय सेवा का दर्जा देकर नियमित वेतन देने की मांग प्रमुख रही।
इसके अलावा सभी पुजारियों और महंतों के लिए आयुष्मान कार्ड जारी करने तथा धार्मिक यात्राओं की निःशुल्क व्यवस्था किए जाने की भी मांग उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि मंदिरों से जुड़े लोगों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए।
बैठक में शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई अहम प्रस्ताव रखे गए। हिंदू विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक जिले में आधुनिक गुरुकुल खोले जाने, पीपीपी मॉडल के तहत नए गुरुकुलों को अनुमति देने तथा इनके संचालन के लिए “सनातन यूनिवर्सिटी” की स्थापना की मांग की गई। साथ ही अंग्रेजी विषय को छोड़ अन्य विषयों की पुस्तकों में अनावश्यक अंग्रेजी भाषा के बढ़ते प्रयोग का विरोध किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को केवल नौकरी तक सीमित न रखकर रोजगार कौशल, योग्यता और संस्कार आधारित बनाया जाना चाहिएमठ-मंदिर विभाग प्रमुख एडवोकेट अश्वनी भारद्वाज ने कहा कि हिंदू समाज अपने दायित्वों को भूलता जा रहा है और मंदिरों की बिगड़ती स्थिति के लिए समाज भी जिम्मेदार है। उन्होंने अपील की कि प्रत्येक सनातनी परिवार को अपने निकट स्थित मंदिर को नियमित आर्थिक सहयोग देना चाहिए।आचार्य दयाराम वेदपथी ने कहा कि धर्म परिवर्तन के लिए विदेशों से बड़ी मात्रा में धन आ रहा है, ऐसे में समाज को आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
कार्यकारिणी प्रमुख केशवनाथ वैश्य ने बड़े धार्मिक स्थलों के प्रबंधन और व्यापारिक गतिविधियों में गैर धर्म के लोगों की भागीदारी पर आपत्ति जताई। वहीं कार्यकारिणी प्रमुख देवदत्त शर्मा ने कहा कि अंग्रेजों ने गुरुकुल व्यवस्था को नष्ट कर संस्कृत को कमजोर किया और अब हिंदी भाषा भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल और नैतिक शिक्षा जैसी पुस्तकों में अंग्रेजी भाषा के बढ़ते प्रयोग पर चिंता व्यक्त की।एडवोकेट राजीव रायजादे ने मनुस्मृति और सामाजिक व्यवस्था पर अपने विचार रखते हुए कहा कि धर्म परिवर्तन कानूनी रूप से संभव है तो जाति परिवर्तन की स्वतंत्रता पर भी विचार होना चाहिए। साथ ही उन्होंने सभी सनातनियों को अपना गोत्र जानने पर जोर दिया।
जिला संयोजक देवेश शर्मा ने भोजशाला प्रकरण को हिंदू समाज के लिए ऐतिहासिक बताते हुए इसे पुनर्जागरण का दौर बताया। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता और एकता की आवश्यकता है।
बैठक में डॉ. सुशील गुप्ता, सेवानिवृत्त मैनेजर आर.एस. सक्सेना, सेवानिवृत्त एडीएम रामवीर सिंह, राजीव भारद्वाज, पंकज शर्मा, राकेश गुलाटी, विजय रतन सिंह, दीपक सक्सेना, दीपक रस्तोगी, ओमप्रकाश कश्यप, राकेश साहू, सूर्य देव वर्मा, रचित साहू, गोपाल कृष्ण शर्मा सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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