कल्चरल कार्निवल में हुई अखिल भारतीय काव्य और मुशायरा प्रतियोगिता
बरेली। ऑल इंडिया कल्चरल एसोसिएशन के तत्वाधान में 78 वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 25 जनवरी को संजय गांधी कम्युनिटी हॉल बरेली में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने किया।
कवि सम्मेलन में
इकबाल आजर, सत्यप्रकाश शर्मा, डॉ.राजेश डोभाल, नदीम अनवर, सत्येंद्र शर्मा, इम्तियाज अकबराबादी, विवेक श्रीवास्तव, विजय श्री, वंदिता पवन शर्मा ने काव्य पाठ किया। कवि सम्मेलन का संचालन कवि रोहित राकेश ने किया।
कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए रोहित राकेश ने कहा कभी ना हिले वो बुनियाद चाहिए
वतन हमेशा ही आबाद चाहिए।
देहरादून से पधारे साहित्यकार डाॅ. राजेश डोभाल राज ने कहा
गद्दारों की कुछ युक्ति करो,
है देश द्रोही जो भारत के
उनकी बुद्धि की शुद्धि करो।
कवि विवेक श्रीवास्तव ने कहा
राम ही राष्ट्र है, राम ही प्रजा
भारत के संविधान में राम
राम सत्य है, राम सनातन
देश के कण कण में राम है।
देहरादून से पधारे कवि
इक़बाल ‘आज़र ने सुनाया
पड़ोसी से न मिल पाया पड़ोसी,
मिरी क़िस्मत भी हिंदुस्तान सी है।
देवबन्द से पधारे कवि नदीम अनवर ने सुनाया
ज़मीं पे चांद बिछा दूं नज़र को जाम करूं,
वो आ तो जाएं किसी दिन ये एहतमाम करूं।
बिजनौर से पधारे कवि इम्तियाज़ अकबराबाद ने सुनाया
ये जो आज का है शाइर इसे कम न तुम समझना,
नये ज़ाविए से हर दम नई बात कह रहा है।
सत्यप्रकाश ‘सत्य’ प्रेम बिरह गीत सुना “यारे कागा
जा सजना के देस
नैन हुए पाषाण, पिया बिन
ले जा यह संदेश
रे कागा जा सजना के देस।
विजय वंदिता ने सुनाया
जब सुने ना कोई तेरी आवाज़ को,
तू अकेला ही चल ले के हर साज़ को।
तेरी मंज़िल तो माना कठिन है रही,
ये यक़ीं रखना ख़ुद पे के तू है सही।
सतेन्द्र शर्मा तरंग ने सुनाया
आशा के आकाश पर दृष्टि रहे, अनिमेष इतने करो प्रयास तुम कुछ भी रहे न शेष।
पवन शर्मा ने सुनाया
हर भारत वंशी का अब ये ज़ोर होना चाहिए।
खात्मा आतंक का हर ओर होना चाहिए।
है समय की मांग भूलें आज हम कश्मीर को,
अब तिरंगे के तले लाहौर होना चाहिए।
निर्णायक मंडल में आकाशवाणी बरेली के कार्यक्रम अधिशासी गौरव सक्सेना, डॉ. सैयद सिराज अली, सुनील धवन, कमल श्रीवास्तव रहे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव शर्मा टीटू और संयोजक अंकुर किशोर सक्सेना ने कहा कि 26 जनवरी को सुबह 11 बजे से स्थानीय कलाकार अपनी नृत्य, गायन और लोकनृत्य आदि की प्रस्तुतियां देंगे। शाम को तीन नाटकों सहारनपुर की क्रांति ज्योति सावित्री बाई, शाहजहांपुर का हमारे बापू और मुम्बई का रोंग टर्न का मंचन किया जाएगा। सचिव सुनिल धवन ने कहा कि 27 जनवरी को प्रातः 11:00 बजे से सांस्कृतिक रंग यात्रा निकाली जाएगी व 3:00 बजे से विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। सह संयोजक कमल श्रीवास्तव ने कहा कि शाम को 4 बजे से नाटक समारोह में चार नाटकों देहरादून का माला का वर, दिल्ली का कस्तूरबा के गांधी, दिल्ली का शिकारी, दिल्ली का पतझड़ के बाद का मंचन किया जाएगा। मीडिया प्रभारी देवेन्द्र रावत ने कहा कि इस बार समारोह भव्य और दिव्य होगा साथ ही प्रवेश पूर्णतया निःशुल्क रहेगा। सभी सुधीदर्शकों से कार्यक्रम में भारी संख्या में सहभागिता करने का भी अनुरोध किया। कार्यक्रम में आए हुए सभी अतिथियों और दर्शकों का कार्यकारी अध्यक्ष डॉ.सैयद सिराज अली ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर
देहरादून के फिल्म निर्माता स्वप्निल सिन्हा, समाजसेवी पवन सक्सेना, नीलम वर्मा, हरजीत कौर, रवि सक्सेना, प्रदीप मिश्रा, प्रमोद उपाध्याय, राजीव लोचन शर्मा, डॉ. अजय राज शर्मा, भूपेन्द्र नाथ वर्मा, रत्ना वर्मा, मेराज, नाहिद बेग, दिलशाद, अमित कक्कड़, लवलीन कपूर, सचिन श्याम भारतीय, भारतेंदु सिंह, जितेन्द्र मिश्रा, मो. नबी, नूरेन, आरिफ खान, अभिषेक सक्सेना आदि उपस्थित रहे।













































































