प्रयागराज। माघ मेले में स्वच्छता कर्मियों के सम्मान को केंद्र में रखते हुए वाटर वुमन शिप्रा पाठक ने अपने मेला शिविर में माँ नर्मदा का जन्मोत्सव सेवा और कृतज्ञता के भाव के साथ मनाया। गंगा-यमुना-सरस्वती के पावन संगम पर “नर्मदे हर” के जयघोष के बीच पूजन-आरती और भंडारे के आयोजन के दौरान मेला क्षेत्र में दिन-रात स्वच्छता व्यवस्था संभाल रहे स्वच्छता प्रहरियों को पुष्पवर्षा कर सम्मानित किया गया और ठंड से राहत के लिए उन्हें कंबल वितरित किए गए। शिप्रा पाठक ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच माघ मेले को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने का श्रेय स्वच्छता कर्मियों को जाता है, जो श्रद्धालुओं द्वारा फैलाए गए कचरे और प्लास्टिक को गंगा से निकालकर नदी की पवित्रता बनाए रखते हैं और वास्तव में संतों के समान पुण्य कार्य कर रहे हैं। नर्मदा, शिप्रा, गोमती सहित अनेक नदियों के संरक्षण के लिए लगभग 13 हजार किलोमीटर की पदयात्राएँ तथा अयोध्या के सरयू तट से रामेश्वरम तक 3950 किलोमीटर की यात्रा कर चुकी शिप्रा पाठक ने कहा कि उनकी नदी यात्राओं ने उन्हें यह सिखाया है कि नदियों की रक्षा तभी संभव है जब स्वच्छता कर्मियों को सम्मान और समाज का सहयोग मिले। मौनी अमावस्या की पूर्व संध्या पर उनके नेतृत्व में निकाली गई साधु-संतों की पर्यावरण यात्रा और संत शिविरों में पौधों के वितरण के माध्यम से भी स्वच्छता कर्मियों के सम्मान, नदी संरक्षण और पर्यावरण जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।सम्मान समरोह से पूर्व कार्यक्रम ने 101 कन्याओं का पूजन कर उन्हे प्रसाद वितरण किया गया।इस मौके पर बड़ी संख्या में पंचतत्व सदस्यों समेत श्रद्धालू उपस्थित रहे।