बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के 22 वर्ष पूरे, नई श्रम संहिताओं के खिलाफ संघर्ष का ऐलान
बरेली। बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के 22 वर्ष पूरे होने के अवसर पर रविवार को रोटरी भवन में “नई श्रम संहिताएं: मजदूर वर्ग पर हमला” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं को मजदूर विरोधी बताते हुए इनके खिलाफ व्यापक संघर्ष का आह्वान किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन अध्यक्ष मुकेश सक्सेना ने की। कार्यक्रम की शुरुआत प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच द्वारा प्रस्तुत जोशीले गीतों से हुई। गोष्ठी के आरंभ में बीटीयूएफ के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने संगठन के 22 वर्षों के इतिहास, शहर में किए गए आंदोलनों, विरोध प्रदर्शनों और सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फेडरेशन ने हमेशा मजदूर-कर्मचारियों के मुद्दों पर एकता बनाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नई श्रम संहिताओं के लागू होने से मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला हुआ है, जिसके खिलाफ और व्यापक एकजुटता की जरूरत है।
बीटीयूएफ के उपाध्यक्ष ध्यानचंद्र मौर्य ने श्रम आंदोलनों और श्रम कानूनों के इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि जब मजदूर वर्ग संगठित और संघर्षशील रहा, तब उसके हितों में कानून बने। लेकिन वर्तमान सरकार पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर मजदूरों को गुलामी की ओर धकेल रही है। मुख्य वक्ता आल इंडिया इंश्योरेंस इम्प्लाइज एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अमान उल्ला खान ने चारों लेबर कोड्स की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इनसे यूनियन बनाना और हड़ताल करना लगभग असंभव हो जाएगा। उन्होंने बताया कि काम के घंटे बढ़ाने और न्यूनतम वेतन को कमजोर करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसानों ने संघर्ष कर कृषि कानून वापस कराए, उसी तरह मजदूरों को भी लंबी लड़ाई के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने 12 फरवरी को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। गोष्ठी में डॉ. अंचल अहेरी, गीता शांत, जितेंद्र मिश्रा, नवींद्र कुमार, सलीम अहमद, रजनीश तिवारी सहित कई वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। संचालन उप महामंत्री ललित चौधरी ने किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मजदूर, कर्मचारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।













































































