बरेली बार एसोसिएशन चुनाव में हाई-वोल्टेज मुकाबला
बरेली। बरेली बार एसोसिएशन के द्विवार्षिक चुनाव को लेकर इस बार माहौल बेहद दिलचस्प और रोमांचक बन गया है। निवर्तमान अध्यक्ष मनोज हरित युवा अधिवक्ताओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं तो वहीं वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बीच भी अपनी एक साफ़सुथरी छवि लेकर एक खास पहचान बनाये हुए हैं। जहां निवर्तमान अध्यक्ष मनोज हरित सोच, पारदर्शिता और बदलाव के एजेंडे के साथ एक बार फिर मैदान में उतरे हैं, तो वहीं अनिल द्विवेदी और ज्वाला प्रसाद गंगवार भी अपनी किस्मत आजमाने के लिए चुनावी मैदान में उतरे हुए हैं। मनोज हरित का कहना है कि उनके कार्यकाल में बार एसोसिएशन को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालने का प्रयास किया गया और आगे भी अधिवक्ताओं की सुविधाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। युवा अधिवक्ताओं का एक बड़ा तबका उन्हें ऊर्जावान नेतृत्व के प्रतीक के रूप में देख रहा है। उनका मुख्य उद्देश्य अपने सभी युवा साथी अधिवक्ताओं को बैठने का स्थान उपलब्ध कराना होगा। अध्यक्ष पद की रेस में पूर्व अध्यक्ष अनिल द्विवेदी और निवर्तमान अध्यक्ष मनोज हरित आमने-सामने हैं, वहीं ज्वाला प्रसाद गंगवार भी अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं। एक ओर दोनों दिग्गज प्रत्याशियों की सीधी टक्कर ने पूरे बार परिसर में चुनावी सरगर्मियों को तेज कर दिया है। वहीं ज्वाला प्रसाद गंगवार की चुनावी मौजूदगी को अधिवक्ता नकार चुके हैं। अधिवक्ताओं के बीच यह चुनाव चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है और हर कोई परिणाम को लेकर उत्सुक नजर आ रहा है। हालांकि मनोज कुमार हरित के एक बार पुनः अध्यक्ष पद पर आसीन होने के आसार नजर आ रहे हैं। बार परिसर में इन दिनों हर ओर चुनावी माहौल साफ नजर आ रहा है। छोटी-छोटी बैठकों, समूह चर्चाओं और व्यक्तिगत जनसंपर्क का दौर लगातार जारी है। प्रत्याशी अपने-अपने समर्थकों के साथ अधिवक्ताओं से संवाद कर रहे हैं और समर्थन जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। चुनावी चर्चा केवल बार परिसर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहर के विभिन्न स्थानों पर भी अधिवक्ताओं के बीच इस मुकाबले को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। प्रत्याशियों ने अपने चुनावी एजेंडे में बार के समग्र विकास को प्राथमिकता दी है। अधिवक्ताओं के लिए बेहतर बैठने की व्यवस्था, पुस्तकालय का आधुनिकीकरण, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार, पार्किंग और चैंबर जैसी बुनियादी समस्याओं के समाधान को प्रमुख मुद्दों के रूप में रखा गया है। इसके साथ ही न्यायालय प्रशासन से बेहतर समन्वय और अधिवक्ताओं के सम्मान व सुरक्षा से जुड़े विषय भी दोनों के एजेंडे में शामिल हैं।
इस बार का चुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि मुकाबला बेहद कांटे का है। दोनों प्रत्याशियों की मजबूत पकड़ और समर्थकों की संख्या को देखते हुए अंतिम परिणाम किसके पक्ष में जाएगा, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। साफ है कि बरेली बार एसोसिएशन का यह चुनाव न केवल रोचक होगा, बल्कि आने वाले समय में बार की दिशा और दशा तय करने में भी अहम भूमिका निभाएगा। अधिवक्ताओं की निगाहें अब मतदान और परिणाम पर टिकी हुई हैं, जो इस ऐतिहासिक मुकाबले का फैसला करेगी, और यकीनन परिणाम एक बार फिर बार एसोसिएशन के पक्ष में ही आएगा।














































































