रुहेलखंड का मिनी कुंभ ककोड़ा मेला में डेरे तंबुओं का अस्थाई शहर बसने लगा
बदायूँ । रुहेलखंड का सुप्रसिद्ध मिनी कुंभ मेला—ककोड़ा अब अपनी भव्यता की ओर तेजी से अग्रसर है। शासन-प्रशासन की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ तैयारियों में जुटी हुई है। जिला प्रशासन के अधिकारी रोजाना निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में लगे हैं। गंगा किनारे तंबुओं का विशाल नगर आकार लेने लगा है। श्रद्धालुओं और दुकानदारों के पहुंचने से मेले की रौनक दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इस बार मेले में सरकार की योजनाओं और जनकल्याणकारी नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जनजागरण अभियानों का आयोजन किया जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा पल्स पोलियो, नशा मुक्ति, साक्षरता और स्वास्थ्य शिविर जैसे विविध कार्यक्रम चलाए जाएंगे। लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से जनहित संदेशों को रोचक और प्रेरणादायक रूप में प्रस्तुत करेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाटों की तैयारी जोरों से चल रही हैं। घाटों की सफाई, बैरिकेडिंग और सुरक्षित स्नान के प्रबंध सुनिश्चित किए जा रहे हैं। पूरे मेला क्षेत्र में बल्लियों पर ट्यूबलाइट और जेनरेटर की फिटिंग का कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है, ताकि रात्रि में भी उजाले और सुरक्षा का पूर्ण वातावरण बना रहे। मेले में अस्थायी कोतवाली, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, कंट्रोल रूम और अग्निशमन केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रशासन ने संयुक्त रूप से व्यापक खाका तैयार किया है। पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी व्यवस्था लागू की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष का ककोड़ा मेला सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रूप में आयोजित होगा। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए यातायात, जलापूर्ति, स्वच्छता और चिकित्सा सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गंगा की निर्मल धारा के बीच जब आस्था का सैलाब उमड़ेगा।













































































