प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन RTPAS-2025 का शुभारंभ

बदायूँ ।राजकीय स्नातक महाविद्यालय के वनस्पति विज्ञान एवं प्राणी विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में रिसेंट ट्रेंड्स इन प्लांट एंड एनिमल साइंस विषय पर केंद्रित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ ऑनलाइन माध्यम से हुआ।
उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा और अनुसंधान को सर्वसमाज के विकास एवं उससे सम्बंधित नीति-निर्माण से जोड़ने की आवश्यकता है।
विशिष्ट अतिथि संयुक्त निदेशक, उच्च शिक्षा डॉ शशि कपूर ने प्रतिभागियों को नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व पर केंद्रित शोध करने की प्रेरणा दी। गेस्ट ऑफ ऑनर डॉ. बी. एल. शर्मा, सहायक निदेशक, उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश ने शोधार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने शोध कार्य को व्यावहारिक जीवन और आमजन की आवश्यक आवश्यकताओं को ध्यान में रख करें।
बरेली परिक्षेत्र के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ सुधीर कुमार ने इस आयोजन को बदायूँ क्षेत्र की शैक्षणिक उपलब्धियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण सार्थक पहल बताया। तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के पहले दिन सॉइल राइजोस्फेरिक प्रणाली की नैनो-बायोइंजीनियरिंग विषय पर रूस के प्रोफ़ेसर डॉ. विष्णु डी. राजपूत ने विस्तार से व्याख्यान देकर सिद्ध किया कि राइज़ोस्फीयर बैक्टीरिया पौधों की जड़ों वाले मृदा क्षेत्र में विविध सूक्ष्मजीवी जैविक गतिविधि और पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित करते हैं जो पौधों की गुणवत्ता और पोषण के लिए जिम्मेदार है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रो. शम्सुल हयात एवं प्रो. आलोक श्रीवास्तव ने फसल सुधार , उच्च गुणवत्ता के पोषकतत्व युक्त विविध प्रकार के फसलों के उत्पादन के लिए नैनो टेक्नोलॉजी की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए इसे आम उपभोक्ता के स्वास्थ्य लाभ एवं किसानों के आर्थिक लाभ की दृष्टि से अपनाने पर बल दिया। एम.जे.पी. रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के शोध निदेशालय के निदेशक प्रो. आलोक श्रीवास्तव ने भारी धातुओं और अन्य प्रदूषकों का बायोडिग्रेडेशन की प्रक्रिया को समझाया। यूनाइटेड किंगडम के प्रोफेसर डॉ. ख्याइन यू मार ने एशियन हाथियों की व्यवसायिक शोषण पर चिन्ता जाहिर करते हुए उनकी सुरक्षा और स्वतंत्रता के लिए उपाय सुझाए।
इसके अतिरिक्त विभिन्न देशों और भारत के कई राज्यों से आए प्रतिभागियों ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किए। आयोजन समिति की संयोजक डॉ. प्रियंका सिंह उदघाटन सत्र का तथा डॉ. गौरव कुमार सिंह तकनीकी सत्र का संचालन किया। समन्वयक डॉ सचिन कुमार राघव ने बताया कि इस सम्मेलन में लगभग 500 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें दक्षिण अफ्रीका, चीन, श्रीलंका, नेपाल सहित अनेक देशों और भारत के 20 से अधिक राज्यों से विद्वान, शोधार्थी एवं प्राध्यापक सम्मिलित हैं।
पहले दिन के प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और भविष्य में शोध सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। अंत में प्राचार्य डॉ श्रद्धा गुप्ता ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया।