मानसून सत्र पर रिजिजू का दावा – सरकार को मिली 100% सफलता, विपक्ष पूरी तरह खाली हाथ

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के समापन पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे सरकार और देश के लिए बेहद सफल बताया, जबकि विपक्ष के लिए असफल और नुकसानदायक करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के हंगामे और अवरोधों के बावजूद सरकार ने अपना सारा विधायी काम पूरा कर लिया। रिजिजू के मुताबिक यह सत्र 100 प्रतिशत सफलता दर वाला रहा।रिजिजू ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों में विपक्ष ने लगातार हंगामा किया, लेकिन सरकार ने जनता के हित में अपने सभी काम निपटाए। उन्होंने बताया कि 14 विधेयक लोकसभा में पेश हुए जिनमें से 12 पारित हो गए, वहीं राज्यसभा ने 15 विधेयकों को मंजूरी दी। रिजिजू ने यह भी कहा कि सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी होती है और विपक्ष चाहे जितना विरोध करे, सरकार काम करना बंद नहीं कर सकती।
विपक्ष पर निशाना, कांग्रेस को खास तौर पर घेरा
रिजिजू ने विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के फ्लोर लीडर और व्हिप कभी-कभी सरकार से अनौपचारिक सहमति बना लेते हैं, लेकिन अपनी पार्टी नेतृत्व के दबाव में उसे लागू नहीं कर पाते। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के नए सांसद बहस और चर्चा से ही सीख सकते हैं, लेकिन उनके नेता खुद नहीं सीखते। रिजिजू का इशारा साफ तौर पर कांग्रेस नेता खरगे और राहुल गांधी की ओर था।
विवादित मुद्दों पर विपक्ष का हंगामा
सत्र के दौरान बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा को लेकर विपक्ष ने लगातार संसद की कार्यवाही बाधित की। विपक्ष इसकी चर्चा चाहता था, लेकिन सरकार ने साफ कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक निकाय के प्रशासनिक काम पर संसद में चर्चा नहीं हो सकती। इस दौरान संसद में केवल ऑपरेशन सिंदूर पर दो दिन की चर्चा ही सुचारू रूप से हो सकी। रिजिजू ने कहा कि असहमति और विरोध लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संसद को ठप करना और सरकार को काम करने से रोकना अलोकतांत्रिक है।
विधेयकों और नए प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया
रिजिजू ने गृहमंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में पेश किए गए तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर विपक्ष के विरोध की भी आलोचना की। इन विधेयकों में प्रावधान है कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री अगर किसी गंभीर आपराधिक मामले में 30 दिन तक गिरफ्तार रहते हैं, तो उन्हें पद से हटाना अनिवार्य होगा। रिजिजू ने इसे क्रांतिकारी प्रस्ताव बताया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद अपने पद को इस कानून के दायरे में लाकर पारदर्शिता और जवाबदेही का उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि कुछ दल अपने बचाव के लिए कानून बनाते हैं, लेकिन भाजपा सरकार खुद को भी जिम्मेदार मानती है।