बरेली। ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व की लीलौर झील अब पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने जा रही है। महाभारत काल से जुड़ी यह झील स्थानीय मान्यताओं के अनुसार वही स्थल है, जहां अज्ञातवास के दौरान पांडव रुके थे और यक्ष-प्रश्न प्रसंग हुआ था। इसी धार्मिक आस्था और महत्व को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा-निर्देश पर जिला प्रशासन ने झील को आकर्षक रूप देने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। 52 हेक्टेयर में फैली इस झील के विकास कार्यों की शुरुआत हाल ही में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह के करकमलों से कराई गई। जिलाधिकारी अविनाश सिंह के मुताबिक झील के बीच से गुजर रही सड़क और ऊबड़-खाबड़ इलाके को एक शेप देते हुए मनरेगा की सहायता से जेसीबी मशीनों द्वारा कार्य कराया जा रहा है। यहां चारों ओर खूबसूरत लाइटें लगाई जा रही हैं ताकि शाम के समय पूरा क्षेत्र रोशनी से जगमगा सके। इसके अलावा झील के चारों तरफ फैमिली टूरिस्ट ट्रेन चलाने की योजना भी है, जिसके लिए दिल्ली से विशेष टीम सर्वे कर रही है। झील के किनारे खाली पड़ी भूमि को भी विकसित किया जा रहा है। यहां बच्चों के लिए चिल्ड्रन पार्क, ओपन जिम और अन्य आकर्षक स्थल बनाए जाएंगे ताकि परिवार के साथ आने वाले पर्यटक यहां मनोरंजन का आनंद ले सकें। साथ ही तीन से चार कमरों वाला गेस्ट हाउस भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें किचन, लैट्रिन और बाथरूम की सुविधा होगी। यह सुविधा पर्यटकों को रात में ठहरने का विकल्प भी प्रदान करेगी। धार्मिक और प्राकृतिक महत्व को पर्यटन से जोड़ने की इस योजना से न केवल यह क्षेत्र एक आकर्षक डेस्टिनेशन बनेगा बल्कि आसपास के युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। प्रशासन की कोशिश है कि लीलौर झील को एक कंपलीट पैकेज के तौर पर तैयार किया जाए, जहां लोग परिवार सहित घूमने, ठहरने और धार्मिक महत्व को जानने आ सकें। दिल्ली से मात्र चार घंटे की दूरी और नैनीताल जैसे पर्यटन स्थल के नजदीक होने के कारण यह झील आने वाले समय में बरेली के पर्यटन मानचित्र पर एक बड़ा आकर्षण बनने जा रही है।