मकान, दुकान और मदरसो पर तिरंगा झंडा लहराये, मदरसों में करें कार्यक्रम, बच्चों को बताएं इसका महत्व।

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बरेली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात से जुड़े उलमा की एक गोष्टी दारुल उलूम गेसे आजम बरेली में सम्पन्न हुई। जिसमे उलमा ने कहा कि देश का हर मुसलमान अपने दुकान, मकान पर झंडा लहराये, और साथ ही इस्लामी संस्थाओं, मदरसों, दरगाहो और स्कूल-कालेजों में झंडा लहराये। उलमा ने ये भी कहा कि इस्लाम मानवता को बढ़ावा देता है, और हमारे स्वतंत्रता संग्राम ने भी इन्हीं सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित किया।गोष्टी की अध्यक्षता करते हुए संगठन के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि भारत को आजाद हुए 77 साल गुजर गए आज हम जशने आजादी मना रहे हैं। मैं भारत में रहने वाले तमाम नागरिकों और खास तौर पर मुसलमानों से आह्वान कर रहा हूं कि हर व्यक्ति अपनी दुकान और मकान पर 13 अगस्त से 16 अगस्त तक तिरंगा झंडा लगाएं। मदरसों और स्कूल व कॉलेजों जैसे संस्थानों के जिम्मेदारान से मेरी अपील है कि जशने आजादी को धूम धाम से मनाएं और इस मौके पर कार्यक्रमो का आयोजन करें।मौलाना ने आगे कहा कि तिरंगा झंडा हमारे भारत की शान है जो दुनिया में अपनी शानदार पहचान रखता है। भारत को आजाद करने में सभी सम्प्रदाय के लोगों का योगदान रहा है, इस योगदान में किसी को कमतर के तौर पर नहीं आका जाना चाहिए, हर एक व्यक्ति ने देश को आजाद करने में कुर्बानियां दी है।मदरसे के सभी छात्रों ने तराना-ए-हिंद का पाठ किया और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले अल्लामा फजले हक खैराबादी, मुफ्ती रज़ा अली खा बरेलवी और खान बहादुर खां और अब्दुल कलाम आजाद द्वारा देश की आजादी में निभाई गई भूमिका को याद किया। युद्ध लड़ने के लिए फतवा दिल्ली की जामा मस्जिद से दिया गया था और मुफ्ती इनायत अहमद काकोरवी, हसरत मोहानी और मौलाना किफायत अली काफी मुरादाबादी को अंग्रेजों ने उनकी भागीदारी के लिए दंडित किया था, इन उलमा को काला पानी भेजकर क़ैद किया और कुछ लोगों को फांसी दे दी थी। और देश को ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र होने से पहले हजारों मुजाहिदीन-ए-आजादी ने अपने जीवन का बलिदान दिया था। यह कहते हुए कि भारत किसी एक समुदाय के कारण स्वतंत्र नहीं हुआ, बल्कि देश सभी वर्गों के बलिदान के बाद मुक्त हुआ है।मौलाना गुलाम मोहियूद्दीन हशमती अध्यक्ष मदरसा गैसे आजम बरेली ने कहा कि भारतीय संस्कृति की मुख्य विशेषता ये है कि हिंदू, मुस्लिम, बौध, जैन, सिक्ख, ईसाई आदि सभी समुदाय ने विभिन्न संस्कृतियों और परम्पराओं को स्वीकार करनेकी अपनी क्षमता के साथ भारतीय संस्कृति के समृद्ध किया है। संस्कृति और अध्यात्म का सार केवल एक धर्म से ही जुड़ा नहीं है, बल्कि सभी धर्मों की परम्पराओं ने भारतीय समाज को नैतिकता और आदर्शे से जोड़ा है।मौलाना फारूख नूरी ने कहा कि देश की स्वतंत्रता में हिंदुओं और मुसलमानों का मिश्रित योगदान रहा है। मौलाना अकबर अली ने कहा कि देश की आजादी में हमारे बुजुर्गो का बड़ा योगदान रहा है। मौलाना अबसार रज़ा हबीबी ने कहा कि काकोरी में सैकड़ों बेकसूर लोगों को अंग्रेजों ने शहीद कर दिया था, इस इतिहासिक घटना को 100 साल पूरे हो चुके है। समाजसेवी हाजी नाजिम बेग ने कहा कि सरकार स्वतंत्रा संग्राम सेनानीयों के नाम से डाक टिकट जारी करे और चौराहों के नाम रखे जाये।बैठक मे मुख्य रूप से शकील खां, हाजी असरार खां, रोमान अंसारी, हाफिज अरशद अली, दानिश अंसारी, हाफिज शाहिद , सहजील खां,सलीम अंसारी, शोएब रजा , कारी रजी अहमद, हाफिज शहनवाज रजवी, हाफ़िज अब्दुल वाहिद नूरी, आरिफ अंसारी, आदि लोग उपस्थित रहे।

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