अब दिल की तीनों धमनियों में ब्लॉकेज का बढ़ रहा खतरा, इन सावधानियों का रखें विशेष ध्यान

कानपुर। कोरोना काल के बाद दिल की तीनों धमनियों में ब्लॉकेज के रोगी सबसे अधिक हो गए हैं। एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में रोज औसत तीन बाईपास सर्जरी और 37 एंजियोप्लास्टी होती हैं। इनमें 32 रोगियों के दिल की तीनों धमनियों में ब्लॉकेज मिल रहा है। छह रोगी ऐसे होते हैं जिनकी दो धमनियों और दो रोगियों की एक धमनी में ब्लॉकेज पाया जा रहा है।कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा की कहना है कि यह स्थिति कोरोना काल के बाद बढ़ी है। रोगियों की लिपिड प्रोफाइल जांच भी बिगड़ी हुई मिल रही है। कोलेस्ट्राल और खून में चिकनाई ट्राईग्लीसिराइड का लेवल अधिक रहता है। प्रोफेसर वर्मा का कहना है कि कोरोना संक्रमित रोगियों के ऐसे ही लक्षण मिले हैं। तीन साल से ऐसे रोगियों का ग्राफ अधिक बढ़ा है। इन रोगियों की स्थिति का अध्ययन करने पर पता चला कि कोरोना संक्रमण के कारण इनकी आर्टरी की अंदरूनी पर्त इंडोथीलियम में क्षति हुई है। इस वजह से ब्लॉकेज का खतरा बढ़ गया। कार्डियोलॉजी में आए एक हजार रोगियों की स्थिति का अध्ययन किया गया। पैथोलॉजिकल जांचों में सभी रोगियों के खराब कोलेस्ट्राल बढ़ा हुआ पाया गया। इसके साथ ही खून में चिकनाई जिसे ट्राईग्लीसिराइड कहते हैं, बढ़ी हुई पाई गई। 50 फीसदी रोगियों में ब्लड शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर अधिक मिला है। हृदय के अलावा इसका दुष्प्रभाव गुर्दों, लिवर और शरीर के अन्य अंगों पर भी आता है। प्रोफेसर वर्मा ने बताया कि कोरोना काल के पहले तीन धमनियों के ब्लॉकेज वाले रोगी सबसे कम करते थे लेकिन अब सबसे अधिक हो गए। एक ब्लॉकेज वाले रोगियों की संख्या सबसे कम हो गई है।लॉकडाउन में घर में रहे, बढ़ गई तली-भुनी चीजों को खाने की आदत
प्रोफेसर वर्मा का कहना है कि कोरोना काल में लोगों की खाने की आदत भी बदली थी। लॉकडाउन की वजह से घर में रहना पड़ा। इससे जंक फूड, फास्ट फूड, तली-भुनी आदि चीजों का सेवन बढ़ गया था। साथ ही व्यायाम कम हो गया। यही स्थिति धमनियों में ब्लॉकेज बढ़ाती है। कोरोना संक्रमण के असर से व्यक्ति के शरीर की नसों में अधिक खराबी आई है। नसें कमजोर भी हो गईं। रोगियों की हिस्ट्री से पता चला कि कोरोना काल के बाद भी बिगड़ी फूड हैबिट और व्यायाम की कमी बनी रही। इससे यह दिक्कत सामने आ रही है।
इन बातों का रखें ध्यान
– नियमित व्यायाम और यौगिक क्रियाएं करें
– घर का बना सादा और पौष्टिक भोजन ही करें
– सब्जियों और फलों का सेवन अधिक करें
– फास्ट फूड, डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें
– घी, तेल का सेवन कम करें, मोटा अनाज का इस्तेमाल करें
– एक बार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और हार्ट की स्क्रीनिंग करा लें।