ऐ कातिब ए तक़दीर हमारे नसीबो में भी हज लिख दे
बरेली। बरेली हज सेवा समिति के तत्वाधान में एवान ए मज़हर परिसर में जशन ए हज की महफ़िल सजाई गई,बरेली हज सेवा समिति के संस्थापक पम्मी ख़ाँ वारसी ने बताया कि बाद नमाज़े जोहर नमाज़ियों ने हज के लिये खुसूसी दुआँ की,सबकी आरज़ू होती हैं वो मक्का मदीना देखे और हज का फ़र्ज़ अदा करें, हज अराफ़ात के मैदान पर हो रहा हैं और हिन्दुस्तान में जगह जगह हाजियों की सलामती के लिये दुआँऐ खैर का सिलसिला जारी हैं।आज 5 जून हाजियो के काफ़िले बाद नमाज़े फ़जर मैदान ए अराफ़ात के लिये रवाना हुए अराफ़ात पहुँचकर दोपहर में मस्ज़िद निमराह में हज का खुत्वा हुआ,जोहर और असर ए कसर की नमाज़ अदा हुई,आज़मीन ए हज इस तरह से हज का फ़र्ज़ अदा करेंगे।हज के पाँच दिनों के मुख्य अरकान हैं।इस बार बरेली मण्डल के 787 के लोग हाजी और हज्जन बनकर वतन लौटेंगे। 8 ज़िलहज को एहराम बाधकर हज की नीयत करके बसों के जरिये मिना रवानगी,दिन भर की नमाज़े मिना में अदा करना है। 9 ज़िलहज की सुबह फ़ज़्र के बाद अराफात रवानगी।अराफात में क्याम के साथ जोहर और असर की नमाज़े और खुत्बा के बाद मगरिब तक क्याम।मगरिब की नमाज़ पढ़े बगैर अराफात से मुज्दल्फा रवानगी।रात में क्याम।मगरिब और इशा पढ़ना है।शैतान को मारने के लिये 49 कंकरी बीनना है। 10 ज़िलहज सुबह फ़ज़्र की नमाज़ के बाद मुज्दल्फा से मिना रवानगी।वहाँ पहुँचकर एक शैतान को 7 कंकरी मारना।कुर्बानी करना।हल्क करना।काबे की तवाफ़े ज़ियारत करना।वापस मिना आकर क्याम करना। 11 व 12 ज़िलहज को तीनों शैतान को 7-7 कंकरी मारना।मिना में ही इबादत करना। हज मुकम्मल हुआ और अपने अपने कमरों पर वापस जाना है। शहर इमाम मुफ़्ती खुर्शीद आलम ने दुआ की। इस मौके पर अल्लाह तआला से सभी हज़रिने महफ़िल ने दुआँ की हम सबके नसीब में ये कातिब ए तक़दीर हज लिख दे।सभी ने हज की मुबारक़ बाद पेश की।दुनिया के कोने कोने से लाखों लोग हज के लिये अराफ़ात में जमा हुए हैं।अल्लाह से दुआ है कि सभी हाजियो का हज कुबूल हो। बरेली हज सेवा समिति के अध्यक्ष एवं विधायक हाजी अताउर्रहमान ने कहा कि हम अराफ़ात के मैदान में जो हाजी हज कर रहे उनसे भारत में अमनो सुकून,तरक़्क़ी क़ामयाबी सलामती के लिये दुआँ करने को कहा है और हज की मुबारकबाद पेश की। नबीरा ए आला हज़रत मौलाना कारी तस्लीम रज़ा नूरी ने हाजियो को हज की मुबारकबाद दी। हज ट्रेनर हाजी यासीन कुरैशी ने हज का तरीका और अरकान को बताया। जशन ए हज में मुख्य रूप से ई.अनीस अहमद ख़ाँ,हाजी उवैस खान,इमाम मुफ़्ती खुर्शीद आलम,हाजी शोएब खान,हाजी सय्यद कम्बर हुसैन,दानिश खान,हाजी इक़बाल शामसी,बिलाल खान,हाजी यासीन खान,कलीम नासिर,हाजी मास्टर रज़ी,हाजी नदीम शमसी,गुलरेज़ खान,अतीक चाँद आदि मौजूद रहे।













































































