गाजियाबाद। यति नरसिंहानंद सरस्वती ट्रस्ट की महासचिव डॉ. उदिता त्यागी ने बयान जारी करके कहा कि उच्च न्यायालय ने उनके द्वारा दायर प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) को खारिज करने से इनकार करते हुए यह स्पष्ट किया है कि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की गहन और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस निर्णय के लिए वो उच्च न्यायालय के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हैं। यह न केवल उनके विश्वास को मजबूती देता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायिक प्रक्रिया में सत्य और धर्म की रक्षा के लिए स्थान है। उन्होंने इसके लिए मां बगलामुखी और महादेव की कृपा बताते हुए आगे संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। उनका यह भी कहना है कि यह देखकर निराशा होती है कि न्यायालय ने मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक को बढ़ा दिया है। इससे उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं क्योंकि उनका मानती हूँ कि उनके कृत्यों ने न केवल सामाजिक सौहार्द को प्रभावित किया बल्कि सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए खतरा भी उत्पन्न किया। फिर भी वो उच्च न्यायालय के इस निर्णय का सम्मान करती हैं और आशा करती हैं कि जांच के दौरान सत्य सामने आएगा और न्याय की जीत होगी। डॉ. उदिता त्यागी ने न्यायालय से यह भी अनुरोध किया कि इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए ताकि सनातनियों के साथ-साथ मेरे परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अब के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए अपील की कि वे इस मामले में आगे भी उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें ताकि प्रदेश को दंगे की आग में झोंकने का दोषी बच न सके। मोहित त्यागी की रिपोर्ट