भारत रत्न श्री भीमराव अम्बेडकर समता मूलक समाज के पुरोधा थे : डाक्टर चारू
बरेली। राजीव गाँधी स्टडी सर्किल बरेली मंडल के तत्वाधान में भारत रत्न श्री भीम राव अम्बेडकर के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में पूर्व संध्या में एक गोष्ठी। का आयोजन किया गया। इसमें मंडल कोऑर्डिनेटर डॉक्टर डॉक्टर चारू मेहरोत्राने अम्बेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वो समता मूलक समाज के पुरोधा थे। वह विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री ,राजनीतिज्ञ, लेखक और समाज सुधारक थे। उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया। तथा श्रमिकों .किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया। उन्होंने अपने समाज के उत्थान के लिए अपने जीवन को समर्पित किया तथा भेद भाव से रहित एक सुनहरे राष्ट्र। की कल्पना की जो आज हम सबको साकार होती हुई दिखाई देती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कोआर्डिनेटर प्रोफेसर अलाउद्दीन खान ने कहा। कि भारत रत्न डॉ अम्बेडकर स्वतन्त्र भारत के प्रथम न्याय मंत्री भारत के संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। उनका अपने जाति के प्रति संघर्ष और अपने लोगों को सम्मान दिलाने के लिए जो। प्रयास उन्होंने किए वे प्रशंसनीय हैं। उनका मार्ग कठिन था शायद यही कारण था कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया जो उनके अनुसार जाति भेदभाव को नहीं मानता था। वह छुआछूत को गुलामी से भी बत्तर। मानते थे आज हम सभी। उनके बनाए संविधान की।वजह से हम अपने अधिकारों के लिए। लड़ सकते हैं। और न्याय पा सकते सकत हैं। डॉक्टर बीवी लाल ने कहा के अंबेडकर का जन्म अंबेडकर का जीवन इस बात का उदाहरण हैं कि सभी बुराइयों को दूर करने के लिए शिक्षा ही एक मात्र औषधि है। उनका कहना था यदि दलित शिक्षित होंगे तभी वो उन्नति कर सकेंगे। प्रोफेसर प्रसाद रीना अग्रवाल ने कहा इस संविधान के द्वारा अम्बेडकर ने प्रत्येक नागरिक के अधिकारों को सुरक्षित किया और इस बात का एहसास कराया ये हम स्वतंत्र हैं और हम अपने मूल अधिकारों के लिए हक़ मांग सकते हैं विशेष रूप से महिलाओं के स्त्री धन। के हक की बात करने वाले अम्बेडकर जी ही थे। प्रोफेसर सदरे आलम ने कहा। अम्बेडकर बाद। अपने आप में अंबेडकर की विचारधारा तथा दर्शन को बताता है। और भारत की प्रगति के प्रमुख उद्देश्यों को इसमें निहित किया गया है। वह एक सामाजिक एवं राजनीतिक सुधारक थे। बहुत से लोग उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता के। रूप में भी देखते हैं। डा एल्का मेहरोत्रा ने कहा की। नोबेल पुरस्कार विजेता अमृत सेन ने भी अम्बेडकर के बारे में कहा है।अर्थशास्त्र विषय में वो मेरे पिता हैं अनेकित इतिहास विदों ने उन्हें गरीबों का मसीहा कहा है इसके साथ ही मोहम्मद मन्नान रज़ा खाँ। मंजू खरे। श्रीमती शहबा, निशात आलम. अनुष्का बरखा गुप्ता। शिवानी। अरुण कुमार आदि का सहयोग रहा तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर चारू।मेहरुत्रा ने की और सभी को धन्यवाद दिया।













































































