बरेली। खालसा साजना दिवस (बैसाखी) को मुख्य रखते हुए चल रहे लड़ीवार समागम में शुक्रवार को हैड ग्रन्थी दरबार साहिब ज्ञानी जसविंदर सिंह साबका ने बैसाखी के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए संगत को उसका महत्व बताया इसके उपरांत 9:00 बजे से 10:30 तक इलाही कीर्तन काउंसिल (तीन रागी जत्थों का समूह) द्वारा संगत को कीर्तन श्रवण करवाया गया। जिन्होंने अम्रत को मुख्य रखते हुए शब्द गायन किए साथ ही वाहिगुरू नाम सिमरन के साथ समां बांध दिया। अन्त में अरदास व हुकुम नामे के उपरान्त श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी को बच्चों द्वारा ढोलकी छेनो के साथ कीर्तन करते हुए उनके निजी स्थान तक पहुंचाया गया। कार्यक्रम की समाप्ति पर गुरु का लंगर अटूट बांटा गया।