सब विद्याओं से श्रेष्ठ है “अपने आपको जानना” : प्रेम रावत

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बरेली। जिस चीज की हम यहां चर्चा कर रहे हैं, वो बहुत सरल है। परन्तु इस चीज का सब लोग वर्णन नहीं करते। कोई किसी चीज की कथा करता है, कोई किसी के बारे में बोलता है, पर मैं और किसी विषय पर नहीं आपके विषय में बताना चाहता हूँ। क्योंकि आपकी दुनिया में सबसे जरूरी व्यक्ति आप हैं। लोगों का मानना है कि बनानेवाला जरूरी है। परन्तु आप उस बनाने वाले को समझें, तब तो वो बनाने वाला जरूरी है। अगर आप उसको स्वीकार नहीं करें, नहीं जानें, तो आपकी दुनिया में तो जरूरी नहीं हुआ, जिसको आप पहचानते हैं, जिसको आप जानते हैं, जिसको आप मानते हैं।
आपके जीवन के अंदर, क्या आप इस बात को समझते हैं कि अपने आपको जानना जरूरी है। आप लोगों ने ‘सुकरात’ का नाम तो सुना होगा, तो ग्रीस में डेल्फी से ये ओरेकल निकला कि ‘अपने आपको जानो।” उसके बाद ‘सुकरात’ ने इस बात को लोगों से कहा कि ‘अपने को जानो, समझो यही बात कबीरदास जी ने भी कही। और आत्मज्ञान, इसका मतलब हुआ अपने आपको जानना। हम हरेक चीज को जानने की कोशिश करते हैं, वो कौन है, वो क्या है, पर अपनी तरफ कभी नहीं देखते हैं कि मैं क्या हूँ।
दो चीजें हैं एक, आपका जन्म हुआ, और अगर आपका जन्म नहीं हुआ होता तो आप यहां नहीं होते। अगर आपका जन्म हो गया है, तो यह बात भी निश्चित है कि एक दिन आपको इस संसार से जाना है। यह कोई चाहता नहीं है। इसके लिए लोग बड़ी-बड़ी चीजें करते हैं। लोग भागते हैं, दौड़ते हैं, ढंग से खाते हैं, वजन कम करने की कोशिश करते हैं। क्योंकि हम सब जीना चाहते हैं और हम नहीं सोचना चाहते हैं कि किसी दिन हमारा अंत होगा।
अब बात है कि आप क्या हो! आप किन पदार्थों के बने हुए हो ? ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, कार्बन, कैल्शियम, नाइट्रोजन, फास्फोरस, इन चीजों के आप बने हुए हो। 70 प्रतिशत आप पानी हो। पानी चलता है, पानी बोलता है, तो क्या यह चमत्कार नहीं है? सबसे बड़ा चमत्कार है, परन्तु आप इसको चमत्कार नहीं मानते। यह पृथ्वी 70 प्रतिशत पानी है, आप 70 प्रतिशत पानी हो। आपकी प्रवृत्ति है कि आप बाहर की ओर देखते हैं कि क्या हो रहा है। हम चाहते हैं कि आप अंदर की ओर देखो कि क्या हो रहा है। जिस चीज के आप बने हुए हो, बाहर की सारी चीजें भी उन्हीं चीजों की बनी हुई हैं।
यह जो स्वांस आपके अंदर आ रहा है और जा रहा है, यह आपका स्वांस है। इसके अंदर जो आनंद विराजमान है, वह आपका आनंद है। जब अपने आपको ही नहीं जाना, तो जो जाना या न जाना, वह तो बराबर हुआ। जब तक आपके अंदर, अपने आपको जानने की प्यास नहीं लगेगी, आपकी जिंदगी पूरी नहीं होगी। जिंदगी चलानी आपको है और यह समय आपको मिला है। अगर आप अपने जीवन के अंदर इस जीवन को आनंद से भर सके, तो यह आनंद का आनंद आप ही लेगे और कोई नहीं ले सकता ।

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एक कहानी है

काफी घना जंगल था और वहां एक बहुत ही खूंखार शेर राज करता था। वह हर रोज बिना सोचे-समझे, जहां मर्जी जाता था और जानवरों को मारकर खा जाता था। सारे जानवर उससे बहुत ही परेशान हो गए थे। एक दिन सब उसके पासगए और उससे प्रार्थना कि जी, आप ऐसा मत करो। हम जितने भी जंगल के वासी हैं, हर दिन, समय पर एक जानवर आपके पास आएगा, जिसको आप खा लेना और अपनी भूख मिटा लेना। आपको इधर-उधर जाकर जानवरों को मारने की जरूरत नहीं है।
शेर ने सोचा, बात तो ठीक है। अच्छा रहेगा मेरे को यहां-वहां जाने की जरूरत नहीं होगी और घर बैठे ही मुझे खाना मिल जाएगा। शेर मान गया। तो एक दिन ऐसे करते-करते-करते एक छोटे खरगोश की बारी आयी और वह खरगोश बहुत ही चालाक था। जब वह जाने लगा तो उसकी माँ रोने लगी कि अब तेरी बारी है, आज तेरे को जाना है।
उसने कहा आप चिंता क्यों करते हैं। वह शेर है बड़ा, पर दिमाग से है बेवकूफ। मैं चालाक हूँ, मैं उसको संभाल लूंगा, आप चिंता मत करो।

खरगोश बहुत ही लेट शेर के पास पहुंचा।

शेर गुर्राया इतना लेट क्यों हो गया। मुझे भूख लगी है। मैं तेरा कब से इंतज़ार कर रहा हूँ।

खरगोश बोला यहाँ आते समय जो जंगल का भगवान है, मैं उनसे मिल गया। वो वहां खड़े थे. मैं उनसे बात करने लगा, इसीलिए देरी हो गयी।

शेर ने कहा क्या बात कर रहा था ?

खरगोश बोला भगवान कह रहे थे, ये जो जंगल का राजा शेर मैंने बना रखा है, इसको मैं हटाता हूँ और आज से मैंने तुझे जंगल का राजा बना दिया है।

तो शेर को लगा, ये कैसे हो गया, राजा तो मैं हूँ।

शेर कहता है कि इसका क्या प्रमाण है तेरे पास कि ये हुआ ?

खरगोश ने कहा- मैं देता हूँ प्रमाण। तुम मेरे पीछे-पीछे आओ और देखो, मैं सभी जानवरों को कितना खूंखार लगता हूँ। जैसे ही वह मुझे देखेंगे, भाग जाएंगे।

शेर ने अपना सिर खुजाया कहा अच्छा ठीक है।

आगे-आगे खरगोश और पीछे-पीछे शेर चल रहा है। सचमुच में जहाँ देखो सभी जानवर, कोई इधर भाग रहा है, कोई उधर भाग रहा है।

शेर ने सोचा, सचमुच में इसको राजा बना दिया गया है। यह तो बड़ा खूंखार है। देखो सभी जानवर कैसे भाग रहे हैं। उसने सोचा खरगोश को देखकर भाग रहे हैं। उसको यह नहीं मालूम था, वो उसको देखकर भाग रहे थे, खरगोश को देखकर नहीं।

क्या नसीहत है इस कहानी की ? अपने आपको जानो। क्योंकि शेर अपने आपको नहीं जानता था, खरगोश ने जो कहा उसने मान लिया।

अपने जीवन में जिस दिन, जो आपके हृदय में बैठा हुआ है. जो आपके अंदर बैठा हुआ है, जिस दिन आपके उसको जान लिया हमारे वेद शास्त्र कहते हैं कि आपने सबकुछ जान लिया। आत्मज्ञान की जो विद्या है, यह सब विद्याओं से श्रेष्ठ है। जो अपने आपको नहीं जानता, वह समझ नहीं पायेगा कि वह यहां क्यों है।

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