काकोरी शहीदों की याद में हुई विचार गोष्ठी

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बरेली । काकोरी शहीद यादगार कमेटी द्वारा काकोरी शहीदों की याद में एक विचार गोष्ठी शहीदों की विरासत और आज की चुनौतियाँ का आयोजन नेहरू युवा केंद्र में किया। गोष्ठी के अंत में शाहजहांपुर से आए रंगकर्मी मनीष मुनि ने सुधीर विद्यार्थी द्वारा लिखित नाटक अशफ़ाक राम का मंचन भी किया।
गोष्ठी के प्रारंभ में काकोरी शहीद यादगार कमेटी के सह संयोजक मो. फैसल ने कहा कि काकोरी के शहीदों की विरासत को याद करते हुए बरेली के विभिन्न जनवादी संगठनों व ट्रेड यूनियनों द्वारा यह मुहिम चलाते हुए शहीदों की साझी विरासत-साझी शहादत को लोगों तक ले जाया जा रहा है। जिसके तहत 19 दिसंबर को काकोरी शहीद संदेश यात्रा का आयोजन किया गया था तथा आज यह विचार गोष्ठी आयोजित की जा रही है। आज बढ़ते फासीवादी खतरे के दौर में हमें और मजबूती से इस विरासत को याद करने व लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।काकोरी शहीद यादगार कमेटी इस काम को आगे भी जारी रखेगी।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता सुधीर विद्यार्थी ने कहा हमें समाज की मौजूदा समस्याओं का हल खोजने के लिए इतिहास के आईने में देखना होगा। आजादी के आंदोलन में हिन्दुस्तान प्रजातांत्रिक संघ का गठन कर क्रांतिकारियों ने यह बता दिया कि न सिर्फ आजादी के लिए बल्कि प्रजातंत्र के लिए भी सही ढंग से वही संघर्ष कर सकते हैं। काकोरी के शहीदों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए भगत सिंह व उनके साथियों ने दल के नाम में समाजवाद शब्द जोड़कर अपने विचारों व भविष्य की तस्वीर को स्पष्ट कर दिया था। उन्होंने आगे कहा कि क्रांतिकारी चेतना ज़मीनी संघर्षों से पैदा होती है कोरी किताबों से नहीं।
अशफ़ाक-बिस्मिल की एकता जाति-धर्म की एकता नहीं बल्कि विचारों की एकता थी। आजादी के संघर्ष व उनकी दोस्ती में धर्म कभी आड़े नहीं आया। साझे संघर्ष की विरासत ने उनके विचारों व जीवन को काफी बदल दिया था। शहीद रोशन सिंह के जीवन को भी आजादी के आंदोलन ने काफी बदला था। बरेली से काकोरी केस के क्रांतिकारियों का विशेष जुड़ाव रहा है। उन्होंने सत्याग्रह का प्रयोग करते हुए अपने राजनैतिक अधिकारों के लिए बरेली केंद्रीय कारागार में 53 दिन तक सफल भूख हड़ताल की थी।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए शाहजहांपुर से आए मुख्य अतिथि अशफ़ाक उल्ला खां जी ने कहा कि काकोरी के शहीद इस मुल्क की साझी शहादत-साझी विरासत के प्रतीक हैं। इस मुल्क की आजादी, तरक्की व खुशहाली के लिए काकोरी के शहीदों सहित लाखों नौजवान हरदम संघर्ष करते रहे तथा कुर्बान हो गए। आज हमें खून देने की नहीं बल्कि वक्त देने की जरूरत है। हमें वक्त निकालकर इन शहीदों की विरासत को जानना व लोगों के बीच ले जाना होगा। यही इन शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के उपाध्यक्ष सतीश ने कहा कि काकोरी के शहीदों की साझी विरासत-साझी शहादत को आज हमारी सरकारों द्वारा भुलाया जा रहा है। जनता से जुड़े हुए असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए मंदिर-मस्जिद के मुद्दे उछाले जा रहे हैं। सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए त्योहारों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इस सांप्रदायिक -फासीवादी राजनीति व उन्माद का मुकाबला करने के लिए हमें एकजुट होना होगा तथा काकोरी के शहीदों की विरासत को आगे बढ़ाने होगा।
पी यू सी एल के प्रदेश अध्यक्ष टी डी भास्कर जी ने कहा कि आज सभी संस्थानों में बीजेपी – आर एस एस से जुड़े हुए लोगों को बैठाया जा रहा है। अभी हाल ही में इलाहाबाद हाइकोर्ट के जज द्वारा विश्व हिन्दू परिषद के कार्यक्रम में दिया गया बयान बहुत ही निंदनीय है। यह सब घटनाएं दिखाती हैं कि काकोरी की शहीदों की विरासत को भुलाया जा रहा है।इंकलाबी मज़दूर केंद्र के ध्यान चंद्र मौर्या जी ने कहा कि काकोरी के शहीदों की धारा व विरासत को भगत सिंह व उनके साथियों ने आगे बढ़ाया था। आज यह धारा क्रांतिकारी मज़दूर आंदोलन तक जाती है। आज के दौर में जारी लूट – शोषण तथा सांप्रदायिक फासीवादी आंदोलन के उभार को मजदूरों – किसानों की व्यापक व मजबूत एकता से ही रोका जा सकता है। जिसकी प्रेरणा काकोरी के शहीदों की साझी शहादत-साझी विरासत हमें देती है।अंत में बात रखते हुए गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे बी टी यू एफ के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि काकोरी के शहीदों की विरासत अमर है। हमें इन शहीदों की विरासत को याद करने व आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। साथ ही रंगमंच व गीतों के जरिए भी इस मुहिम को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
विचार गोष्ठी को परिवर्तनकामी छात्र संगठन की दिशा, कर्मचारी कल्याण मंच के अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा, मज़दूर मंडल के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण राणा, अटेवा से डॉ. मुनीश कुमार, बदायूं से आए बिजली संविदाकर्मी यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष हर्षवर्धन, बदायूं से आए जनहित सत्याग्रह मोर्चा के अध्यक्ष प्रेमपाल, ऑटो रिक्शा टेंपो चालक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष कृष्णपाल, वेद प्रकाश बाल्मीकि आदि ने भी संबोधित किया।विचार गोष्ठी में प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच द्वारा “हिंदोस्ता की शान हैं अशफ़ाक और बिस्मिल” गीत प्रस्तुत किया गया।विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि अशफ़ाक उल्ला खां, मुख्य वक्ता सुधीर विद्यार्थी तथा रंगकर्मी मनीष मुनि को प्रतीक चिन्ह के रूप में काकोरी कांड में गिरफ्तार व शहीद हुए क्रांतिकारियों का ग्रुप फोटो भेंट किया गया। गोष्ठी का संचालन क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के ललित कुमार ने किया।गोष्ठी में प्रमुख रूप से बी टी यू एफ के अध्यक्ष मुकेश सक्सेना, कार्यकारी अध्यक्ष अंचल अहेरी, उपाध्यक्ष सलीम अहमद, आल इंडिया लायर्स यूनियन के टी आर लोधी, पी यू सी एल के जिलाध्यक्ष यशपाल सिंह, क्रांतिकारी किसान मंच के संयोजक हिमांशु सिंह, किसान नेता हरचरणलाल गंगवार, तितली पत्रिका के संपादक फईम करार, विद्युत कर्मचारी नेता अवतार सिंह सहित निशा, शिवानी, देव सिंह, उपेश, दीपक कुमार, राजकुमार, महिपाल आदि मौजूद रहे।

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