रुहेलखंड के मिनी कुंभ ककोड़ा मेला में तंबुओं का अस्थाई शहर बसाने की तैयारियां अंतिम चरण में

बदायूं। रुहेलखंड के सुप्रसिद्ध मिनी कुंभ मेला ककोड़ा की तैयारी अब अंतिम चरण में पहुच गई है।
तैयारी को लेकर प्रशासनिक अधिकारी लगातार मेले का जायजा ले रहे हैं। 14 नवंबर को मिले का उद्घाटन और 15 नवंबर को मुख्य स्नान होना है। इसको लेकर मेले में मुख्य द्वार का निर्माण शुरू हो गया है। इसके अलावा मेले में मुख्य मार्ग के दोनों और बल्लियां लगाकर बिजली व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई है। गंगा किनारे मार्ग पर वीआईपी और शासनिक प्रशासनिक अधिकारियों के टैंटों के सामने मुख्य मार्ग पर बल्लियां लगाकर बिजली व्यवस्था की जा रही है।

बरेली मेले की तरफ डंडे और बल्लियां लगाकर बैरिकेडिंग कर दी गई है। टैंट लगाने का कार्य किया जा रहा है। मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले तैयार हो रहे हैं। मेले में मौत का कुआं, बड़ा झूला ड्रोन, ड्रोन ट्रेन, रेंजर टावर, जंपिंग, बच्चों के लिए जहाज, किश्ती, ब्रेक डांस, टोरा टोरा, कटर पिलर, सर्कस, स्पेशल जादू आया हुआ। मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कोतवाली बनाई गई है। मेले में दो एक दुकान भी पहुंच चुकी है। चाट पकौड़ी के अलावा प्रसाद की भी दुकान लग चुकी हैं। झंडी पूजन से पूर्व मेले में सिरकी पाल का काम भी पूरा करने की कोशिश की जा रही है। मेले में जाने वाला मार्ग तैयार हो चुका है जबकि आने वाला मार्ग दुरुस्त किया जा रहा है। मजदूर वीणा डालकर मिट्टी डाल रहे हैं। ट्रैक्टर द्वारा जमीन को समतल करने का कार्य भी किया जा रहा है। कादरचौक क्षेत्र में लगने वाले ककोड़ा मेला में सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। मेले में ककोड़ा गांव के देवी मंदिर से 8 नवंबर को विधिवत झंडी लाई जाएगी और मेला स्थल पर पूजा कर झंडी स्थापित की जाएगी। झंडी स्थापित होने के बाद मेले का शुभारंभ हो जाएगा। 14 नवम्बर को मेले का उदघाटन होगा। मिनी महाकुंभ के नाम से प्रसिद्ध मेला ककोड़ा जिला पंचायत द्वारा आयोजित किया जाता है। जिला पंचायत ही मेले में बिजली, सड़क, हैंडपंप लगवाता है। इस बार जिला पंचायत ने कच्ची सड़कों का जाल बिछाने के बाद मेले में करीब दो दर्जन टॉवर लगाए हैं जिन पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए मेला स्थल पर कोतवाली भी बनाई जाती है। इस बार मेले में आठ नवंबर को अस्थाई कोतवाली बन रही है। बसों के लिए स्टैंड बनाया जा रहा है। मेला स्थल के निकट ही बस स्टैंड बनाया जा रहा है।

मेला स्थल पर करीब साढ़े चार सौ हैंडपम्प लगाए जा रहे हैं। अभी तक 180 हैंडपंप लगाए जा चुके हैं। शेष हैंडपम्प भी एक सप्ताह में लगा दिए जाएंगे। ककोड़ा मेला स्थल पर प्रशासनिक अधिकारियों के अस्थाई कार्यालय बनाए जा रहे हैं। डेरा तम्बू लगाए जा रहे हैं। जिला पंचायत ने सभी विभागों को अलग अलग कार्यालय दिए हैं। सभी के तंबू लगाने का काम किया जा रहा है। गंगा किनारे लगने वाले इस ऐतिहासिक मेले में सुरक्षा की दृष्टि से कई जिलों की पुलिस लगाई जाती है। गंगा घाट पर बनाए गए शक्ति स्नान घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। गंगा घाट पर पहली बार महिलाओं को शक्ति स्नान घर बनाए जा रहे हैं। शक्ति स्नान घर के आस पास पुरूषों को नहीं जाने दिया जाएगा। गंगा घाट पर पुरूषों के अलग स्नान घर बनाए जा रहे हैं। मेले में पांच नवंबर से बिजली पहुंच जाएगी। इसके लिए खंभे लगा दिए गए हैं, केवल लाइन डाल कर सप्लाई शुरू करनी है। अपर मुख्य अधिकारी ककोड़ा मासूम रजा ने बताया कि मेले की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। 8 नवंबर को झंडी स्थापित होते ही मेले में तंबुओं का शहर बसना शुरू हो जाएगा। बाहर से आने वाले लोगों से मैदान भरने लगेगा। प्रशासनिक अधिकारी भी आठ नवंबर से यहां पर मौजूद रहेंगे। मेला प्रशासन के अधिकारी कर्मचारी दिन रात काम कर रहे हैं।