भगवान गौतम बुद्ध की जयंती समारोहपूर्वक धूमधाम से मनाई गई

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बदायूँ। महापुरुष स्मारक समिति एवम सर्व समाज जागरूकता अभियान भारत के संयुक्त तत्वावधान में भगवान गौतम बुद्ध की जयंती (बुद्ध पूर्णिमा) पर सृष्टि मेडिकेयर सेंटर ओरछी चौराहा पर धूमधाम से समारोह पूर्वक मनाई गई। सर्वप्रथम मुख्य अतिथि/मुख्य वक्ता अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि माधव मिश्र एवम कार्यक्रम अध्यक्ष डॉक्टर राजीव कुमार गुप्ता (एमबीबीएस, एम एस) ने संयुक्त रूप से भगवान गौतम बुद्ध की मूर्ति पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। संचालन अब्दुल कादिर ने किया। विशिष्ट अतिथि डॉक्टर सविता वार्ष्णेय , मीडिया प्रभारी प्रमोद कुमार शर्मा रहे।व्यवस्थापक नीतू , पवन कुमार, अंतरेश कुमार रहे। कार्यक्रम आयोजक पण्डित सुरेश चंद्र शर्मा रहे। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि/मुख्य वक्ता अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि माधव मिश्र ने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध का जन्म बैशाख पूर्णिमा को ५६३ईसा पूर्व कपिलवस्तु के पास लुंबिनी में हुआ, जो आज नेपाल का सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। आपके पिता राजा शुद्धोधन थे, आपकी मां रानी माया देवी थीं। आपके जन्म के सात दिन बाद मां का निधन हो गया दूसरी रानी एवम मां की बहिन महा प्रजापति ने आपका पालन पोषण किया। आपका नाम सिद्धार्थ रखा गया। आपके भविष्य की जानकारी के लिए राजा शुद्धोधन ने विद्वानों को बुलाकर पूंछा कि सिद्धार्थ का जीवन कैसा रहेगा? विद्वानों ने कहा यह राजा बनते हैं तो चक्रवर्ती सम्राट होंगे या फिर महान सिद्ध सन्यासी होंगे। राजा शुद्धोधन चिंतित हुए और दुनियां के दुखों से बचाने और संन्यासी बनने से रोकने के लिए उन्होंने सिद्धार्थ को महल की चौखट कभी पार नहीं करने दी सभी शिक्षा दीक्षा की व्यवस्था महल के अंदर ही थी। वह भी सुयोग्य राजा बनाने के लिए। जब राजकुमार सिद्धार्थ सोलह साल के हुए तब विवाह राजकुमारी यशोधरा से किया गया। कुछ समय पश्चात यशोधरा ने एक पुत्र को जन्म दिया और नाम रखा गया राहुल। एक बार उन्होंने राज्य की खुशहाली देखने के लिए राज्य का भ्रमण किया, इस भ्रमण के दौरान उन्हें एक बूढ़ा व्यक्ति मिला राजकुमार सिद्धार्थ ने सारथी से पूंछा यह झुक कर कराह कर क्यों चल रहा है? सारथी ने कहा जब व्यक्ति बूढ़ा हो जाता है तब ऐसे ही चलता है, राजकूमार सिद्धार्थ ने कहा मै भी ऐसा होऊंगा सारथी ने कहा एक दिन यह भी आएगा। कुछ देर बाद एक बीमार मिला उन्होंने सारथी से पूंछा इसे क्या हुआ है सारथी ने कहा जीवन में बीमारियां होती रहती हैं।

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फिर शवयात्रा मिली सारथी से पूंछा यह क्या है सारथी ने कहा आदमी मर गया है उसे जलाने ले जा रहे हैं राजकुमार सिद्धार्थ बोले क्या मैं भी मरूंगा। सारथी बोला जिसका जन्म हुआ है वह एक दिन मरता जरूर है। फिर सन्यासी मिला सारथी से पूंछा यह कौन है सारथी बोला बैराग्य प्राप्त कर संन्यासी बन गया है इसने संसार की मोहमाया को त्याग दिया है। यहीं से राजकुमार सिद्धार्थ के मन में बैराग्य उत्पन्न हो गया। और वह बैभवशाली राज्य को त्यागकर जंगलों की ओर शाश्वत सत्य को जानने चले गए।जहां उन्हें कई तपस्वी मिले उनसे मार्गदर्शन प्राप्त किया लेकिन वह जो जानना चाहते थे वह उन्हें नहीं मिल पा रहा था। एक दिन वह पीपल के वृक्ष के नीचे साधना के लिए बैठे और महासमाधि लग गई जब समाधि टूटी सभी प्रश्नों के उत्तर मिल चुके थे अब वह राजकुमार सिद्धार्थ नहीं बल्कि भगवान गौतम बुद्ध बन गए। जिस पीपल के वृक्ष के नीचे तपस्या की वह बोधिवृक्ष कहलाया, वह स्थान बिहार में बोधिगया के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने मध्यम मार्ग अपना कर लोगों को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाया। वह कहते थे कि दुनिया में तीन चीजें छिपाई नहीं जा सकती सूर्य, चंद्रमा, सत्य। वह कहते थे आपको लक्ष्य मिले या न मिले लेकिन लक्ष्य पाने की यात्रा अच्छी होनी चाहिए। किसी से घृणा करने से आपके मन में वह कभी खत्म नहीं होती है बल्कि प्रेम करने से खत्म होगी। ८०बर्ष की अवस्था में वह ब्रह्मलीन हो गए अर्थात सदा के लिए मौन हो गए। बुद्धं शरणम गच्छामि। शत शत नमन।अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर राजीव कुमार गुप्ता ने एवम मीडिया प्रभारी प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि”भगवान गौतम बुद्ध के उपदेश आज भी प्रासंगिक हैं।”उन्होने शांति का मार्ग बताया जिसे अपनाकर अपना जीवन सफल बना सकते हैं। कार्यक्रम में डॉक्टर सविता बार्ष्णेय, संचालक अब्दुल कादिर, नीतू, पवन कुमार, अंतरेश कुमार, नारायण सिंह, राहुल कुमार, हर्ष यादव, गुड्डू मौर्य, सोनू मौर्य, चेतन यादव, लालू यादव,ज्योति कुमारी, मति मिथलेश, जयवीर सिंह, अनीता, राजवती, अमन कुमार, बब्लू खान, शायम खान, अरशद अली, अयान खान, जाने आलम, शानू, अफसाना, अनस, आरिफ, फैज खान आदि मौजूद रहे।

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