जनकवि भूपराम शर्मा ‘भूप’के व्यक्तित्व और कृतित्व के विविध रंग कार्यक्रम के अंतर्गत ‘स्मृति आख्यान एवं काव्य निशा हुई

बदायूं। ज़िले में निरंतर साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के आयोजन में संलग्न डॉ.उर्मिलेश जनचेतना समिति द्वारा स्मृति शेष जनकवि भूपराम शर्मा ‘भूप’के व्यक्तित्व और कृतित्व के विविध रंग कार्यक्रम के अंतर्गत ‘स्मृति आख्यान एवं काव्य निशा’का आयोजन किया गया। अवसर था जनकवि स्व० पं० भूपराम शर्मा ‘भूप’ की २१ वीं पुण्यतिथि का।इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात शिक्षाविद, पूर्व प्राचार्य बरेली कॉलेज, बरेली श्रद्धेय डॉ एन. एल. शर्मा ने की। कवियों में नरेन्द्र गरल,डॉ.राम बहादुर व्यथित, टिल्लन वर्मा, चंद्रपाल सिंह सरल, महेश मित्र, हिमांशु श्रोत्रिय, अरविन्द धवल, कुलदीप अंगार ने अत्यंत भावपूर्ण काव्य पाठ करके कार्यक्रम को गरिमा दी और ऊँचाई प्रदान की।

- कवि डा. अरविंद धवल जी ने कहा।
आओ हम समृतियों का वंदन कर लें।
श्रद्धांजलि का शब्द शब्द चंदन कर लें।। - कवि डा. गीतम सिंह,गीत जी ने कहा।
सत सत नमन है भूपराम भूप जी को।
उनके कृतित्व और व्यक्तित्व को प्रणाम है।। - कवि महेश मित्र जी ने कहा।
किन शब्दों में करें प्रशंसा जनवादी कवि भूप की।
जिनका दिल गहराई लिए था सच मानो इक भूप की।।
बरेली से पधारे ग़ज़लकार हिमांशु श्रोत्रिय ने कहा – आज शिक्षा का लिखें क्या प्राक्कथन मत पूछिए,
कौन सी मंज़िल पे है पाठन पठन मत पूछिए। - कवि डा. राम बहादुर जी ने कहा।
भतरी के तुम लाल थे, काव्य~जगत के भूप।
अमर रहोगे तुम सदा, शत~शत वंदन भूप।। - कवि एन एल शर्मा जी ने कहा।
शब्द ऋषि थे धनी काव्य के सुन्दर परम अनूप।
शत~शत वंदन श्री चरणों में स्वीकारें कवि भूप।। - कवि चंद्रपाल सिंह जी ने कहा।
संतो जैसा आचरण, संतो जैसा वेश।
याद रखेगा भूप जी, तुम्हें काल औ देश।।
*कवि कुलदीप अंगार जी ने कहा।
सोत के किनारे कविता के सोत खोल दिये
जल लोक भाषा का बहाया प्राण पण से । कवि नरेन्द्र गरल जी ने कहा।
करुण वेदना के निलय हो गए हो।
दिरंगो के सलिल में विलय हो गए हो।।
कवि टिल्लन वर्मा जी ने कहा।
हाल गांव का ठीक नाय है भले मान सौ।
जित देखो, तित ठाय~ठाय है भले मान सौ।।

इस अवसर पर कार्यक्रम के आयोजक और उर्मिलेश जनचेतना समिति के सचिव,कवि डॉ .अक्षत अशेष ने भी अपने पितामह भूप जी को शब्द सुमन अर्पित किये। भूप राम शर्मा भूप जी के सुपुत्र,गीतकार एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ.उपदेश शंखधार ने भी अपने पिता की प्रतिनिधि रचना ‘मुंशी निपट निगुनिया बोल’ सुना कर सबको मंत्र मुग्ध कर दिया। डॉ. सोनरूपा विशाल ने भी अपने बाबा की रचना ‘मेरे बालम भये प्रधान’ सुनाई। कार्यक्रम का सुंदर,सफल संचालन भूप जी की ज्येष्ठ पौत्री एवं लोकप्रिय कवयित्री डॉ सोनरूपा विशाल ने किया। इस अवसर पर मंजुल शंखधार,जे.जे.डिग्री कॉलेज के प्राचार्य अजीत शंखधार, रवींद्र मोहन सक्सेना, नरेश शंखधार, भारत शर्मा राज, कुमार आशीष, भानु प्रताप सिंह,अभिषेक अनंत,नितिन गुप्ता,सौरभ शंखधार,डॉ.शुभ्रा माहेश्वरी, गायत्री मिश्रा, नरेश शंखधार, सुमित मिश्रा, अभिनव सारस्वत, ज्ञानेश मिश्रा, प्रमोद शंखधार, इकबाल असलम, डा संजीव गुप्ता आदि उपस्थित रहे। अंत में डॉ.उपदेश शंखधार ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।