“आत्म रक्षा प्रशिक्षण” शिविर का आयोजन किया गया

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बदायूँ। गिन्दो देवी महिला महाविद्यालय की आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आई० क्यू०ए० सी०) के तत्वावधान में प्राचार्या डॉ वंदना शर्मा के संरक्षण एवं निर्देशन में व कॉर्डिनेटर आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आई० क्यू०ए० सी०)व प्रभारी मिशन शक्ति असिस्टेंट प्रोफेसर सरला देवी चक्रवर्ती के संयोजन एवं नेतृत्व में चलाए जा रहे में चलाए जा रहें “मिशन शक्ति विशेष अभियान” के तहत “आत्म रक्षा प्रशिक्षण” कार्यक्रम का आयोजन किया गया।जिसमें छात्राओं ने बढ़ चढ़ कर प्रतिभाग किया।

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कार्यक्रम का शुभारंभ प्राचार्या डॉ वंदना शर्मा के द्वारा माँ शारदे के समक्ष द्वीप प्रज्वलित कर किया गया।
छात्राओं को संबोधित करते हुए प्राचार्या डॉ वंदना शर्मा ने महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा के लिए मार्शल आर्ट के प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन में कभी कभी ऐसे अवसर आ जाते हैं कि हमें अपनी सुरक्षा स्वयं करनी पड़े तो ऐसे में घबराने की बजाय हिम्मत एवं हौसलों के साथ हालात का सामना करना चाहिए। महिला अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसी परिस्थितियों में छात्राओं के लिए असामाजिक तत्वों केे जवाब देने और अपनी रक्षा के लिए इस तरह का प्रशिक्षण बेहद जरूरी है। इससे हमारा आत्मबल मजबूत होगा।


कार्यक्रम संयोजक व प्रभारी मिशन शक्ति असिस्टेंट प्रोफेसर सरला देवी चक्रवर्ती ने बताया कि महिलाओं के प्रति अपराध निरंतर बढ़ रहे हैं। बलात्कार, छेड़छाड़, अपहरण और हत्या आदि अपराध के सबसे सामान्य रूप हैं।आज वह तेजाब से होने वाले हमलों और छेड़छाड की वजह से भी स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। वर्तमान समय में लोगों की मानसिकता ऐसी हो गई है कि वे किसी पीड़िता के साथ हो रही हिंसा को अनदेखा कर देते हैं और बिना कोई प्रतिक्रिया दिए, वहाँ से चले जाते हैं। इससे वह घर के बाहर अपने को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। इसके लिए जरूरी है उन्हें सशक्त बनाने की, ताकि वह विषम परिस्थिति में अपनी सुरक्षा स्वयं कर सके। इसके लिए उन्हें मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षण लेना आवश्यक है। जो महिलाओं एवं छात्राओं को सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भर बनाएगा। प्रशिक्षक के रूप में शारिरिक शिक्षा विभाग की डॉ० सोनी मौर्य ने छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया।उन्होंने बताया कि बालिकाओं एवं महिलाओं को विपरीत परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली विभिन्न रणनीतियों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने नारी सुरक्षा के लिए सात जरूरी टेक्नीक बताई कि किस तरह से हाथ, नाक, कान, गला, घुटना एवं कमर के ऊपर और नीचे किस प्रकार प्रयोग कर हम हमलावर से अपनी रक्षा कर सकते हैं। इस अवसर पर समस्त महाविद्यालय परिवार उपस्थित रहा। सभी छात्राओं की सक्रिय सहभागिता रही।

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