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बड़े मंगल पर पर्यावरण की मिसाल: पंचतत्व संस्था ने बांटे 25 हजार हरे पत्तल, 2000 पौधों से दिया हरियाली का संदेश

May 19, 2026By admin0 comments
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लखनऊ। धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली पंचतत्व संस्था ने बड़े मंगल के अवसर पर एक बार फिर समाज के सामने अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। संस्था की ओर से इस बड़े मंगलवार को भी लखनऊ महानगर के विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 25 हजार हरे पत्तलों और करीब 2000 पौधों का वितरण किया गया। संस्था की इस पहल का उद्देश्य बड़े मंगल के अवसर पर लगने वाले भंडारों को प्लास्टिक और थर्मोकोल मुक्त बनाकर स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
बड़े मंगल के दिन राजधानी लखनऊ में जगह-जगह विशाल भंडारों का आयोजन किया जाता है, जहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। ऐसे आयोजनों में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और थर्मोकोल के बर्तनों का प्रयोग होता है, जिससे भारी मात्रा में कचरा उत्पन्न होता है। यही कारण है कि पंचतत्व संस्था ने इस बार बड़े मंगल को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी के साथ जोड़ते हुए एक विशेष अभियान शुरू किया है।संस्था के संयोजक अंकित पाठक ने बताया कि मंगलवार सुबह से ही संस्था के वालेंटियर शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंच गए थे और भंडारा आयोजकों के बीच हरे पत्तलों का वितरण किया गया। उन्होंने कहा कि पहले संस्था के सदस्यों को स्वयं भंडारों तक पहुंचकर लोगों से संपर्क करना पड़ता था, लेकिन अब समय बदल रहा है और लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि अब शहर के नागरिक और भंडारा आयोजक दो दिन पहले ही संस्था को अपनी आवश्यकता की जानकारी दे देते हैं, जिससे वितरण कार्य और अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। यह बदलाव समाज में बढ़ती पर्यावरणीय चेतना का संकेत है और यह दर्शाता है कि लोग अब अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझने लगे हैं।

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अंकित पाठक ने कहा कि पंचतत्व संस्था का प्रयास केवल पत्तलों के वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्था लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए पौधारोपण के प्रति भी जागरूक कर रही है। इसी क्रम में इस बार लगभग 2000 पौधों का भी वितरण किया गया। विशेष बात यह रही कि ये पौधे हनुमान चालीसा से अभिमंत्रित बताए गए, जिससे धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया।उन्होंने बताया कि संस्था की संस्थापक वाटर वूमेन शिप्रा पाठक ने लगभग दो महीने पहले यह संकल्प लिया था कि इस बार बड़े मंगल के अवसर पर लगने वाले भंडारों को प्लास्टिक मुक्त बनाया जाएगा। उनका उद्देश्य केवल पत्तलों का वितरण करना नहीं बल्कि श्रद्धा और सेवा के इस पर्व को पर्यावरण हितैषी स्वरूप देना है।शिप्रा पाठक का मानना है कि यदि धार्मिक आयोजनों में छोटे-छोटे बदलाव किए जाएं तो इससे बड़े स्तर पर सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि लाखों लोगों के बीच आयोजित होने वाले आयोजनों में प्लास्टिक की जगह प्राकृतिक विकल्पों का प्रयोग हो, तो हजारों टन कचरे को रोका जा सकता है।संस्था के पदाधिकारियों ने बताया कि प्लास्टिक और थर्मोकोल की प्लेटों में गरम भोजन परोसना स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्म खाद्य पदार्थ प्लास्टिक के संपर्क में आने पर रासायनिक तत्वों का प्रभाव भोजन में पहुंच सकता है, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। ऐसे में हरे पत्तल न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी सुरक्षित माने जाते हैं।पंचतत्व संस्था की इस पहल को अब केवल सामाजिक संगठनों का ही नहीं बल्कि मीडिया कर्मियों और आम नागरिकों का भी भरपूर समर्थन मिलने लगा है। संस्था के संयोजक ने बताया कि शहर के कई लोग स्वेच्छा से इस अभियान का हिस्सा बनने के लिए आगे आ रहे हैं और विभिन्न स्तरों पर सहयोग प्रदान कर रहे हैं।पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और धार्मिक आयोजनों में बदलाव की यह पहल आने वाले समय में एक नई सामाजिक क्रांति का रूप ले सकती है। बड़े मंगल जैसे विशाल आयोजनों को प्लास्टिक मुक्त बनाना निश्चित रूप से आसान नहीं है, लेकिन पंचतत्व संस्था ने जिस तरह यह जिम्मेदारी उठाई है, वह समाज के लिए प्रेरणा बन रही है।
श्रद्धा, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का यह संगम लोगों को यह संदेश दे रहा है कि यदि सामूहिक प्रयास किए जाएं तो परंपराओं को बनाए रखते हुए प्रकृति की रक्षा भी की जा सकती है। पंचतत्व संस्था का यह अभियान आने वाले दिनों में और भी बड़े स्तर पर समाज में बदलाव की नई इबारत लिख सकता है।

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