झूठे एससी एक्ट मुकदमे के विरोध में भाकियू टिकैत का अनिश्चितकालीन धरना शुरू
बदायूं। भारतीय किसान यूनियन टिकैत के सदर तहसील उपाध्यक्ष एवं ओझा गांव के पूर्व प्रधान पर दर्ज कथित फर्जी, झूठे और कूट रचित एससी एक्ट मुकदमे के विरोध में भाकियू कार्यकर्ताओं ने आवास गृह पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता डेरा-तंबू लगाकर धरने पर बैठ गए और निष्पक्ष जांच होने तक घर वापसी न करने का ऐलान किया।
धरना स्थल पर पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बदायूं में अच्छे और निर्दोष लोगों पर झूठे मुकदमे लिखे जा रहे हैं, जिसके चलते हर महीने 50 से अधिक लोगों को जेल जाना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फरेबी और झूठे मामलों में निर्दोषों को फंसाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 21 अप्रैल को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अंकित शर्मा के कार्यालय में ज्ञापन और शपथ पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा झूठे मुकदमे का पर्दाफाश करने की मांग की गई थी। उस दौरान सीओ उझानी ने एसपी कार्यालय में ही ज्ञापन लेकर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन 20 दिन बीत जाने के बावजूद जांच टीम गांव नहीं पहुंची।
मंडल प्रवक्ता राजेश कुमार सक्सेना ने कहा कि मामले की खुली जांच होनी चाहिए। यदि जांच में तहसील उपाध्यक्ष दोषी पाए जाते हैं तो वह स्वयं उनका साथ छोड़ देंगे, लेकिन निर्दोष लोगों को जेल नहीं जाने दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि झूठे मुकदमों में कार्रवाई बंद नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और बड़ा रूप दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन कानून का सम्मान करती है, लेकिन झूठे मुकदमे दर्ज कर निर्दोषों को परेशान करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धरना तब तक जारी रहेगा जब तक निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती।
धरने में सदर तहसील अध्यक्ष अर्जुन सिंह, बृजपाल प्रजापति, ब्लॉक अध्यक्ष सलारपुर पप्पू सैफी, शगगन, नदीम, ओंकार, रामलाल, पुत्तूलाल, लेखराज, कैलाश, भंवर पाल, छत्रपाल, महेश, अरविंद, अरुण समेत कई दर्जन कार्यकर्ता मौजूद रहे। गांव ओझा के जाटव समाज के दर्जनों लोगों ने भी धरने में समर्थन दिया।















































































