मणिपुर हिंसा की पीड़िता कुकी-जो युवती की तीन साल बाद मौत, न्याय का इंतजार अधूरा

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मणिपुर में मई 2023 की जातीय हिंसा के दौरान दरिंदगी का शिकार हुई कुकी-जो समुदाय की युवती की करीब तीन साल बाद मौत हो गई। गंभीर शारीरिक चोटों और गहरे मानसिक सदमे से जूझ रही युवती ने 10 जनवरी 2026 को गुवाहाटी के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। मौत के समय उसकी उम्र करीब 20 वर्ष थी।

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घटना 15 मई 2023 की है, जब 18 वर्षीय युवती इम्फाल के न्यू चेकॉन इलाके में एटीएम से पैसे निकालने गई थी। आरोप है कि वहां उसे जबरन रोककर हथियारबंद लोगों के हवाले कर दिया गया। हमलावरों ने उसकी आंखों पर पट्टी बांधकर इम्फाल के अलग-अलग इलाकों में ले जाकर उसके साथ बेरहमी से यौन उत्पीड़न और मारपीट की। बाद में उसे मरा समझकर छोड़ दिया गया, लेकिन एक ऑटो चालक ने समय रहते उसे अस्पताल पहुंचाकर जान बचाई।

मणिपुर में प्रारंभिक इलाज के बाद हालत गंभीर होने पर उसे गुवाहाटी रेफर किया गया। मेडिकल सूत्रों के अनुसार, हमले में उसके गर्भाशय को गंभीर नुकसान पहुंचा था। बार-बार संक्रमण और गहरे मानसिक आघात के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने दुष्कर्म, अपहरण और हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया था, लेकिन समुदाय के नेताओं का आरोप है कि तीन साल बीतने के बाद भी किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। कुकी महिला संघ और जनजातीय एकता समिति ने इसे प्रशासन की बड़ी विफलता करार दिया है।

युवती की मौत के बाद कांगपोकपी और चुराचंदपुर में कैंडल मार्च निकालकर श्रद्धांजलि दी गई। जनजातीय संगठनों का कहना है कि पीड़िता ने वर्षों तक पीड़ा झेली, लेकिन उसे न्याय नहीं मिल सका और उसकी जिंदगी अस्पताल के वार्डों व अदालती फाइलों के बीच बीत गई।

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