मंदिर में जलाभिषेक कर गई शांतिधारा बिल्सी। नगर के मोहल्ला आठ मैन बाजार स्थित पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर पर आज बुधवार को जैन धर्म के सत्रहवें तीर्थंकर कुंथुनाथ का गर्भ कल्याणक यहां मनाया गया। यहां सबसे पहले जैन धर्मावलंबियों द्वारा भगवान जिनेन्द्र स्वामी का जलाभिषेक कर शांतिधारा की गई। इसके बाद पूजा पाठ कर अर्घ्य समर्पित किये गए। श्री दिगम्बर जैन महा समिति के मंडलाध्यक्ष प्रशान्त जैन ने बताया कि उनका जन्म हस्तिनापुर में वैशाख शुक्ल प्रतिपदा के दिन हुआ। पिता सूर्यसेन हस्तिनापुर के राजा और माता महारानी श्रीकांता थीं। जैन धर्मग्रंथों के अनुसार अपने पूर्व जन्म के पुण्यों के प्रताप से ही कुंथुनाथ चक्रवर्ती राजा बने। उनकी आयु 95 हजार वर्ष की थी। जब उनकी आयु के 23 हजार 750 वर्ष बीते, तब राजा सूर्यसेन ने कुंथुनाथ विवाह कर दिया और सारा राजपाट उन्हें सौंप कर स्वयं मुनि बन गए। पुण्य फलों की प्राप्ति के कारण ही कुंथुनाथ को सभी सांसारिक और दैवीय सुख प्राप्त थे तथा यक्ष, किन्नर, राक्षस, मनुष्य और देव उनके हर संकेत का पालन करने को तत्पर रहते थे। इसी तरह कई वर्ष बीतते गए और एक दिन वे वन भ्रमण के लिए राज दरबार से निकले। वन में उन्होंने एक दिगंबर मुनि को कठोर तप करते देखा, तो उन्हें आत्म बोध हुआ और उनके मन में सांसारिक भोगों के प्रति अरुचि उत्पन्न हो गई। वे उल्टे पांव राज दरबार लौट कर आए, अपने पुत्र को राज्यभार सौंपा और स्वयं भी मुनि-दीक्षा ले ली। इस समय तक उनकी आयु लगभग 48 हजार वर्ष थी। इस मौके पर अरविंद जैन, अनिल जैन, ज्योति जैन, अर्चना जैन, नीलम जैन, मानसी जैन, अभिषेक जैन आदि मौजूद रहे।