दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन: तकनीकी सशक्तीकरण के साथ साथ मानवीय पक्षों का भी हो संरक्षण

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बरेली । दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन अलग अलग टेक्निकल सेशन में शोधार्थियों ने ऑन शोध पत्र प्रस्तुत किए तथा समापन सत्र का आयोजन शिक्षा विभाग के सभागार में हुआ जिसमें सेमिनार संयोजक डॉ मीनाक्षी द्विवेदी ने सेमिनार की रिपोर्ट पढ़ते हुए बताया कि संगोष्ठी में देशभर के विविध संथानाओ का प्रतिनिधित्व रहा ,ऑग्युमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी एवं अन्य विषयों पर 170 से अधिक अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, संगोष्ठी में हुई गहन चर्चा में सभी प्रतिभागियों ने एजुकेशन 5.0 की अवधारणा को समझा और पाया कि भविष्य की शिक्षा में तकनीक तो आए परंतु मानवीय मूल्य हमेशा प्राथमिक रहें। एआई रहेगी परंतु शिक्षक की भूमिका कभी समाप्त नहीं होगी। चर्चा से यह पता लगा की डिजिटल पैरामीटर तय किया जाये, इसमें इंक्लूसिव एजुकेशन के टूल्स अधिक उपयोगी होंगे साथ ही मशीन लर्निंग तो हो परंतु मानव का विकल्प मशीन नहीं हो सकती साथ ही सेमिनार में बहुत से उपयोगी विचार भी आए जो शोधार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। विशेष वक्ता प्रो तूलिका सक्सेना ने कहा कि हम सभी को तकनीक के समय में मानवीय गुणों का ध्यान रखने की आवश्यकता है । संस्थानों को एक ऐसा लर्निंग इकोसिस्टम बनाने कि आवश्यकता है जहां नवाचार हो साथ ही संवेदना भी हो अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर हो साथ ही नैतिक जिम्मेदारी का एहसास भी हो । EQ, IQ तथा DQ इन तीनों का सामंजस्य होना चाहिए । तकनीक एक टूल है लेकिन मानवीयता हमारा लक्ष्य है ।
विशिष्ट वक्ता प्रो आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि सभी विद्यार्थियों की समस्या है कि अपना शोध कार्य करते समय वह एआई का प्रयोग करते हैं और साथ ही अब प्रत्येक विद्यार्थी को अन्य विषय भी समझने चाहिए।
शोध में अब आवश्यक हो गया है की कार्य पूरा करने पर एआई रिपोर्ट मांगी जाएगी। अतः सभी विद्यार्थियों को सावधानी और समझदारी से एआई टूल्स का प्रयोग करना होगा ये हम सभी के लिए ये चुनौतीपूर्ण समय है और हमें मशीन और मनुष्य के मध्य संतुलन पर कार्य करना होगा
प्रो मनोज सक्सेना समापन सत्र के मुख्य वक्ता प्रोफ़ मनोज सक्सेना ने बताया की पूर्व की शिक्षा में शिक्षक बालक के निर्माण का प्रमुख केंद्र रहा साथ शिक्षा में मानवीय मूल्य सर्वोपरि थे वर्तमान में जब मशीन और आर्टिफीसियल इंटेलिजेम्स का युग आया है तब अच्छे साहित्य और सामग्री का अभाव सा होता जा रहा है । एआई का न्यायसंगत उपयोग करें । तकनीक के आधुनिकीकरण के कारण आजकल के विद्यार्थी पुस्तकों से दूर होकर मशीन आधारित कार्य कर रहे हैं जिस कारण सार्थक शोधकार्य नहीं जो पा रहे हैं । तकनीक को मानवता की सेवा के लिए प्रयोग करना चाहिए । NEP 2020 बहुविषयक उपागम को अपनाने पर जोर देती है और इन मायनों में मस्तिष्क , हृदय और चरित्र का ठीक से विकास हो तो उसके लिए आवश्यक है की नैतिक गुणों के साथ हम अपनी रचनात्मकता को बढ़ावा दें ।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के मुख्य नियंता प्रो रवेंद्र सिंह ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों एवं शिक्षा क्षेत्र में कार्य करने। वाले शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं । शोध कार्य को आपस में मिलजुल कर करें जिस से एक दूसरे के विचारों के आदान प्रदान के द्वारा नवीन विचारो को जन्म दे सकते हैं
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए संकायाध्यक्ष प्रो संतोष अरोड़ा ने बताया कि जब भी तकनीक आती है तो लगता है वह मानव का विकल्प है जबकि ऐसा नहीं है तकनीक कभी मनुष्य का विकल्प नहीं हो सकती इसी प्रकार शिक्षा में शिक्षक का महत्व हमेशा से रहा है और आगे भी रहेगा आवश्यकत इस बात की है कि शिक्षक उपयुक्त वातावरण तैयार करे हमे तकनीक का विरोध नहीं करना है बल्कि हमारे सीखने के उद्देश्य कैसे पूरे हों उस प्रकार का वातावरण हम तैयार करें और जहाँ आवश्यकता हो ए आई एवं अन्य तकनीकों का प्रयोग करें जिस से हम अधिक कौशल पूर्ण तरीके से कार्य कर सकते हैं ।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन सेमिनार आयोजन सचिव डॉ राम बाबू सिंह ने किया तथा कार्यक्रम का संचालन विमल कुमार ने किया ।
संगोष्ठी में श्रेष्ठ शोधपत्रों को पुरस्कृत किया गया जिसमे विद्यार्थी श्रेणी में विधि अवस्थी एवं नामरा मिर्जा को शोधार्थी श्रेणी में शालिनी सक्सेना एवं शाबिया तथा शिक्षक श्रेणी में डॉ अर्चना मिश्रा को पुरस्कृत किया गया । विभिन्न तकनीकी सत्रों में प्रो कौशल शर्मा डॉ शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ,का भी सहयोग रहा
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के विद्यार्थी , शोधार्थी उपस्थित रहे साथ ही लखनऊ से प्रो कौशल शर्मा प्रो यशपाल सिंह प्रो सुधीर कुमार वर्मा , डॉ तरुण राष्ट्रीय , डॉ प्रेमपाल ,डॉ कीर्ति प्रजापति डॉ रश्मि रंजन , कपिल मोहन तिवारी , शिवि, सना अबरार, आकाश , जगदीश आदि उपस्थित रहे ।

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